लेख
13-Jan-2026
...


वर्तमान वैश्विक परिदृश्य गहरी अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है और हम भारतीय आनंद के साथ अपने तीज-त्यौहार मना रहे हैं, पूरे देश में भव्य रूप में विभिन्न उत्सवों व समारोहों का आयोजन हो रहा है। हमें यह भी याद रखना होगा कि इसके पीछे हमारे पूर्वजों का बलिदान और भावी योजना है, क्योंकि आज जब हम देखतें हैं तो एशिया, यूरोप, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के अनेक हिस्सों में युद्ध, गृहसंघर्ष, सत्ता संघर्ष और तख्तापलट की घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को लगातार कमजोर कर रही हैं। सीमाई विवाद सशस्त्र टकराव में बदल रहे हैं, लोकतांत्रिक संस्थाएँ दबाव में हैं और विश्व अर्थव्यवस्था पर इसका सीधा असर दिख रहा है। परिणामस्वरूप ऊर्जा संकट, बढ़ती महँगाई और आपूर्ति-श्रृंखला में बाधाओं ने विशेष रूप से विकासशील देशों के सामने अस्तित्व और स्थिरता की दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है। ऐसे संकटों से भरे वातावरण में भारत का दृष्टिकोण संतुलित, परिपक्व और दूरदर्शी दिखाई देता है। जहाँ कई देश युद्ध और टकराव को ही समाधान मान रहे हैं, वहीं भारत ने कूटनीति, संवाद और संयम को प्राथमिकता दी है। भारत ने यह करके दिखाया है कि स्थायी समाधान शक्ति-प्रदर्शन से नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण निर्णयों से निकलता है। पड़ोसी पाकिस्तान के संदर्भ में भी भारत का यही दृष्टिकोण रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उत्पन्न तनावपूर्ण परिस्थितियों में भारत ने सैन्य दृढ़ता के साथ-साथ रणनीतिक संयम का परिचय दिया। उकसावे के बावजूद स्थिति को व्यापक युद्ध में बदलने से रोकना, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तथ्यों के साथ शांतिपूर्ण पक्ष रखना और क्षेत्रीय शांति को प्राथमिकता देना भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करता है। आज पूरा विश्व देख रहा है बांग्लादेश में भीड़ द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों का नरसंहार हो रहा है, अमेरिका-रूस और वेनेजुएला विवाद, ईरान में आंतरिक विरोध, इज़रायल-लेबनान संघर्ष, मध्य-पूर्व में तनाव, सीरिया की सैन्य कार्रवाइयाँ, यूक्रेन, गाज़ा, सूडान और म्यांमार के युद्ध, अफ्रीका में तख्तापलट, चीन-ताइवान तनाव, पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हिंसा, अफगानिस्तान की अस्थिरता और नेपाल की राजनीतिक कमजोरी यह सब दर्शाता है कि वैश्विक व्यवस्था गहरे संकट में है। ऐसे समय में भारत का संयमित व्यवहार और विकास-केंद्रित सोच यह संदेश देती है कि स्थायी शक्ति संवाद, सामाजिक सद्भाव और समावेशी प्रगति से ही बनती है। इन सबके बावजूद भारत के भीतर विकास की गति निरंतर बनी रही। सड़क, रेल, बंदरगाह और हवाई अड्डों जैसे बुनियादी ढाँचों का विस्तार होने के साथ ही डिजिटल इंडिया के माध्यम से तकनीकी समावेशन, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलना भारत की विकास-केंद्रित नीति को दर्शाते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से अंतिम पंक्ति के नागरिक तक विकास पहुँचाने का प्रयास जारी है। नवीकरणीय ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रतिबद्धता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में उठाए गए कदमों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत को मजबूत आधार दिया है। भारत ने विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखा है। एक ओर सैन्य तैयारी और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया, तो दूसरी ओर लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक सौहार्द को सुरक्षित रखने पर भी जोर दिया। यही संतुलन भारत को उन देशों से अलग करता है, जहाँ सत्ता संघर्ष और अस्थिरता ने विकास को वर्षों पीछे धकेल दिया। देश के भीतर सुधारों की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से आगे बढ़ी है। महिला आरक्षण, जीएसटी के माध्यम से कर-व्यवस्था का एकीकरण, तीन तलाक पर प्रतिबंध, अनुच्छेद 370 का निरसन, नागरिकता संशोधन अधिनियम, नई शिक्षा नीति, श्रम संहिताओं का सरलीकरण, दिवालियापन संहिता, डिजिटल डेटा संरक्षण कानून, औपनिवेशिक आपराधिक कानूनों के स्थान पर नई न्याय संहिताएँ, आतंकवाद और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सख्त प्रावधान तथा चुनावी-प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एसआईआर जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि सुधार केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर लागू किए जा रहे हैं। विकास के ये प्रयास ज़मीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं, जिनमें दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पूर्व-पश्चिम कॉरिडोर, वंदे भारत ट्रेनें, अमृत भारत स्टेशन योजना, अयोध्या, काशी और सोमनाथ का सांस्कृतिक पुनर्विकास, मुंबई की कोस्टल रोड और अटल सेतु, सौर-पवन ऊर्जा परियोजनाएँ, मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों का विस्तार, हर-घर जल योजना, गगनयान और सेमीकंडक्टर परियोजनाओं में निवेश तथा सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क-सुरंग-पुल निर्माण ने यह साबित किया है कि भारत की विकास योजनाएँ ठोस कार्यों में बदल रही हैं। वर्ष 2025 में सुरक्षा की दृष्टि से भारत ने विवेकपूर्ण भूमिका निभाई है। छत्तीसगढ़-तेलंगाना के सीमावर्ती जंगलों में ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट के तहत नक्सल-माओवादी नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई की गई। बीजापुर (छत्तीसगढ़) में नक्सली हिंसा के बाद क्षेत्र-नियंत्रण और तलाशी अभियान चलाए गए। नियंत्रण रेखा और वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सतत गश्त और त्वरित तैनाती से स्थिरता बनाए रखी गई। साथ ही अजेय वॉरियर-25 (राजस्थान), हरिमाऊ शक्ति-2025 (मलेशिया), ऑस्ट्राहिंद-2025 (ऑस्ट्रेलिया) और ब्राइट स्टार-2025 (मिस्र) जैसे अभ्यासों से अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग को मजबूती मिली। राष्ट्रीय नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल-2025 और रक्षा आधुनिकीकरण ने भारत की तैयारी को और सुदृढ़ किया। स्पष्ट है कि युद्ध और अराजकता के इस दौर में भारत ने विवेक, संवाद और समावेशी विकास के मार्ग को चुना है। यही भारतीय दृष्टिकोण न केवल देश के भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि वैश्विक शांति में भी सकारात्मक योगदान देता है। भारतीय विवेक की यही विजय है और संतुलित विकास ही उसकी पहचान है, जो भविष्य में भारत के विश्व गुरू बनने की राह प्रशस्तप करते हैं। हमें गर्व है कि हम ऐसे महान देश के नागरिक हैं और हमारा सौभाग्य है जो हमने भारत भूमि पर जन्म लिया है। अपने कर्तव्यों और दायित्वों का ईमानदारी से पालन कर हमें देश के स्वाभिमान की रक्षा करनी होगी, ताकि हमारी आने वाली पीढ़ी आनंद व उमंग के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में अपने गौरवमयी इतिहास को देख सके। ( लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं।) ईएमएस / 13 जनवरी 26