अंतर्राष्ट्रीय
14-Jan-2026


वॉशिंगटन (ईएमएस)। भारत की रक्षा प्रणाली में एक नए युग की शुरुआत करते हुए स्वदेशी पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट (एलआरजीआर-120) ने भारतीय सेना की युद्ध रणनीतियों को पूरी तरह बदलने के संकेत दिए हैं। हाल ही में सामने आई एक वैश्विक रक्षा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना अब अंधाधुंध फायरिंग की पारंपरिक तकनीक से आगे बढ़कर दुश्मन के ठिकानों पर पिन-पॉइंट सटीकता और गहराई से प्रहार करने की क्षमता हासिल कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नया रॉकेट सिस्टम पारंपरिक तोपखाने को एक ऐसे घातक प्रतिरोधक हथियार में बदल देता है, जो न केवल सीमावर्ती इलाकों तक सीमित रहेगा, बल्कि दुश्मन के देश के भीतर गहरे तक जाकर सैन्य बुनियादी ढांचे को नष्ट करने में सक्षम होगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित इस अत्याधुनिक प्रणाली का पिछले वर्ष सफल परीक्षण किया गया था। परीक्षणों के दौरान एलआरजीआर-120 ने 120 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों को अविश्वसनीय सटीकता के साथ भेदकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया। इस स्वदेशी तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे सेना के पास पहले से मौजूद पिनाका लॉन्चरों से ही दागा जा सकता है। इसके लिए किसी नए और महंगे प्लेटफॉर्म की आवश्यकता नहीं है, जिससे न केवल संचालन में आसानी होगी बल्कि सरकारी खजाने पर भी अतिरिक्त बोझ कम पड़ेगा। तकनीकी रूप से यह रॉकेट सिस्टम बेहद उन्नत है। इसमें इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस), बीच रास्ते में डेटा अपडेट करने की सुविधा और हमले के अंतिम चरण के लिए विशेष गाइडेंस तकनीक का उपयोग किया गया है। पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर की एक इकाई से एक साथ आठ गाइडेड रॉकेट दागे जा सकते हैं। युद्ध के मैदान में ये रॉकेट दुश्मन के कमांड सेंटरों, महत्वपूर्ण तोपखाने की तैनाती और रसद (लॉजिस्टिक) ठिकानों को पलक झपकते ही तबाह करने की शक्ति रखते हैं। इस भारतीय तकनीक की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फ्रांस जैसे विकसित देशों ने भी पिनाका सिस्टम में गहरी रुचि दिखाई है। अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में इसकी बढ़ती मांग इस बात का प्रमाण है कि भारतीय रक्षा उत्पाद वैश्विक मानकों पर खरे उतर रहे हैं। हालांकि अमेरिकी हिमार्स जैसे सिस्टम की रेंज वर्तमान में अधिक हो सकती है, लेकिन पिनाका भारत को लागत और आत्मनिर्भरता के मामले में रणनीतिक बढ़त दिलाता है। भविष्य की योजनाओं पर नजर डालें तो पिनाका का विकास यहीं रुकने वाला नहीं है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में इसकी मारक क्षमता को 200 से 300 किलोमीटर तक बढ़ाने पर काम चल रहा है। यह विस्तार भारत के लिए अपनी सीमाओं, विशेषकर चीन और पाकिस्तान से लगी सीमाओं पर सुरक्षा कवच को और अधिक अभेद्य बना देगा। यह प्रणाली न केवल भारत की सैन्य तैयारियों को मजबूती दे रही है, बल्कि मेक इन इंडिया के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन के संकल्प को भी नई ऊंचाइयां प्रदान कर रही है। वीरेंद्र/ईएमएस/14जनवरी2026