कोपेनहेगन(ईएमएस)। अटलांटिक महासागर में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक घटनाक्रम के तहत, डेनमार्क ने अमेरिकी सैन्य बलों को एक विवादित तेल टैंकर को रोकने और जब्त करने की कार्रवाई में अपना समर्थन दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह तेल टैंकर कथित तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था। डेनिश सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को इस सैन्य सहयोग की पुष्टि की है। यह सहयोग ऐसे समय में सामने आया है जब ग्रीनलैंड द्वीप के रणनीतिक नियंत्रण को लेकर डेनमार्क और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव अपने चरम पर बना हुआ है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन यह स्पष्ट किया गया है कि डेनमार्क ने अमेरिका की उस कार्रवाई में सक्रिय भूमिका निभाई जिसमें प्रतिबंधित टैंकर को समुद्र के बीच में ही घेरा गया था। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के समीप समुद्री मार्ग पर कई हफ्तों तक इस जहाज का पीछा किया और इसे रोकने के लिए विभिन्न अवरोधकों का भी प्रयोग किया गया। इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य प्रतिबंधित सामग्री के अवैध परिवहन को रोकना था। यह सैन्य तालमेल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आश्चर्य का विषय बना हुआ है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार सार्वजनिक रूप से आर्कटिक क्षेत्र में स्थित रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने की इच्छा व्यक्त कर रहे हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड की स्थानीय सरकार ने बार-बार कड़े शब्दों में यह स्पष्ट किया है कि यह द्वीप बिकाऊ नहीं है और किसी भी विदेशी शक्ति को इस पर कब्जा करने या इसे खरीदने का अधिकार नहीं है। वर्तमान में व्हाइट हाउस और पेंटागन ने इस विशिष्ट समुद्री ऑपरेशन पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, ग्रीनलैंड के मुद्दे पर दोनों देशों के बीच गंभीर और तनावपूर्ण चर्चा जारी है। जानकारों का मानना है कि प्रतिबंधों के उल्लंघन के खिलाफ की गई यह संयुक्त कार्रवाई दर्शाती है कि रणनीतिक मतभेदों के बावजूद, दोनों देश सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लागू करने के मामले में अभी भी एक-दूसरे के साथ सहयोग कर रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/14जनवरी2026