इन्दौर (ईएमएस) शहर के सिंहासा क्षेत्र में एक बड़े भूमि घोटाले का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें दुबई में रहे एक मृतक व्यक्ति की करोड़ों रुपये की जमीन फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए बेचने का प्रयास किया गया। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की विस्तृत जांच के बाद, पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों, रूबीना और अजमत उल्ला सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाज़ी का मामला दर्ज किया है। टीआई कन्हैयालाल दांगी के अनुसार यह मामला 12.66 हेक्टेयर ज़मीन से जुड़ा है, जिसका मालिकाना हक़ बरकत उल्ला और उनके पुत्र करामत उल्ला के पास था। जांच में सामने आया कि बरकत उल्ला की मृत्यु 7 अक्टूबर 2010 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हो चुकी थी। धोखाधड़ी की शुरुआत तब हुई जब बरकत उल्ला ने अपने रिश्तेदार अय्यूम को आम मुख्तियार (जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी) नियुक्त किया था। आरोपियों ने इसी मुख्तियारनामे के अधिकारों का घोर दुरुपयोग किया। उन्होंने पांच अलग-अलग विक्रय पत्र (सेल डीड) तैयार करवाए, जिनमें कुल 1 करोड़ 2 लाख रुपये से अधिक की राशि दर्शाई गई। मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इन सभी आधिकारिक दस्तावेज़ों में बरकत उल्ला को जीवित दर्शाया गया, जबकि उनकी मौत 13 साल पहले ही हो चुकी थी। इसके अलावा, शपथ पत्रों में जानबूझकर काट-छांट और ओवरराइटिंग की गई थी ताकि धोखाधड़ी को छुपाया जा सके। जांच के दौरान एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। जिस रिश्तेदार अय्यूम को मुख्तियार नियुक्त किया गया था, उसकी भी पहले ही मौत हो चुकी थी। इसके बावजूद, शातिर आरोपियों ने धोखे से उसका फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र भी तैयार कर लिया। पीड़ित परिवार से जुड़े लोगों ने जब इस पूरे फर्जीवाड़े की शिकायत ईओडब्ल्यू से की, तब जाकर मामले की परतें खुलीं। ईओडब्ल्यू द्वारा की गई गहन जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद, ईओडब्ल्यू ने कार्रवाई करते हुए रूबीना पति अजमत उल्ला निवासी नंदनवन माणिकबाग, उसके पति अजमत उल्ला, इल्तिफात अली पुत्र एयू खान और जावेद अली सैय्यद पुत्र हुसैन अली, निवासी अशोक कॉलोनी के भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मामले में आगे कानूनी कार्रवाई जारी है और जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद है। आनन्द पुरोहित/ 14 जनवरी 2026