राज्य
15-Jan-2026
...


- एसपी ने थाना प्रभारी को किया पदमुक्त - तीन अफसरों पर विभागीय जांच कटिहार (ईएमएस)। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत थानों में जमा कराए गए लाइसेंसी हथियारों की निगरानी पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब कटिहार के सहायक थाना के मालखाने से एक लाइसेंसी पिस्टल रहस्यमय ढंग से गायब पाई गई। इस सनसनीखेज मामले ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। घटना को घोर लापरवाही मानते हुए कटिहार के पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए सहायक थाना प्रभारी आनंद कुमार को पदमुक्त कर दिया है। साथ ही, तीन पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए चुनाव आयोग के निर्देश पर जिलेभर में लाइसेंसी हथियार थानों में जमा कराए गए थे। इसी क्रम में चंद्रशेखर सिंह नामक व्यक्ति ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल कटिहार के सहायक थाना में जमा की थी। चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जब वे अपनी पिस्टल वापस लेने थाने पहुंचे, तो पुलिसकर्मियों के पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। जांच करने पर पता चला कि पिस्टल मालखाने से गायब है। थाने के भीतर से हथियार के गायब होने की खबर फैलते ही पुलिस प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। मामला न केवल सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। पिस्टल के गायब होने के बाद सहायक थाना में कांड संख्या 1251/25 के तहत अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक शिखर चौधरी ने तत्काल मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने सहायक थाना प्रभारी आनंद कुमार समेत दो अन्य पुलिस पदाधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया। हालांकि, अधिकारियों की ओर से दिया गया जवाब एसपी को संतोषजनक नहीं लगा। इसके बाद एसपी ने आनंद कुमार को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा दिया और तीनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। एसपी शिखर चौधरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि थाने जैसे सुरक्षित स्थान से हथियार का गायब होना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। यह पुलिस की ड्यूटी में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता का मामला है। उन्होंने कहा कि पुलिस जनता की सुरक्षा की जिम्मेदार है और यदि उसी के परिसर से हथियार गायब होते हैं, तो यह व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न है। मामले की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए सदर वन के एसडीपीओ के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया गया है। यह टीम यह पता लगाएगी कि पिस्टल कैसे गायब हुई, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या यह महज लापरवाही है या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश भी है। जांच के दौरान मालखाने के रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की बारीकी से जांच की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए मालखानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। इस घटना के बाद जिले के अन्य थानों में भी हथियारों और जब्त सामग्री की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, थाने से लाइसेंसी पिस्टल के गायब होने का मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। आम लोगों में भी सवाल उठ रहे हैं कि जब थाने सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।