अंतर्राष्ट्रीय
15-Jan-2026
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तेहरान,(ईएमएस)। पश्चिम एशिया में लंबे समय से सुलग रहा तनाव अब खतरनाक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में ईरान के सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक वीडियो ने इस आशंका को और गहरा कर दिया है। इस वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी धमकी देते हुए जुलाई 2024 में पेंसिल्वेनिया के बटलर में हुई उस रैली की तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया, जहां ट्रंप पर जानलेवा हमला हुआ था। स्क्रीन पर ट्रंप की घायल तस्वीर के साथ लिखा संदेश थाइस बार गोली निशाने से नहीं चूकेगी। इस प्रसारण को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के संदर्भ में बेहद गंभीर संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। यह धमकी ऐसे समय सामने आई है जब यह चर्चा तेज थी कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, बाद में उन्होंने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी भी योजना से इनकार किया। उल्लेखनीय है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान ट्रंप के कान को छूते हुए गोली निकल गई थी और वे बाल-बाल बच गए थे। ईरानी टीवी प्रसारण में उसी घटना का हवाला देकर यह संकेत देने की कोशिश की गई कि अगली बार परिणाम अलग हो सकता है। फिलहाल ईरान सरकार की ओर से इस वीडियो को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि वहां प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमन और फांसी की घटनाएं बढ़ीं तो अमेरिका सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप के अनुसार, जब किसी देश में हजारों लोगों की जान ली जा रही हो और फांसी जैसे कदम उठाए जा रहे हों, तो दुनिया चुप नहीं रह सकती। ईरान ने इन बयानों को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप बताते हुए खारिज किया है और इसे सैन्य दबाव बनाने की कोशिश करार दिया है। क्षेत्र में युद्ध की आशंकाएं तब और बढ़ गईं जब यह खबर सामने आई कि अमेरिका ने कतर स्थित अपने प्रमुख सैन्य ठिकाने अल उदेद एयर बेस से कुछ सैन्य संसाधनों को दूसरी जगह स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले हुए मिसाइल हमले का हवाला देते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने हमला किया, तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान के भीतर हालात भी बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। दिसंबर 2025 से शुरू हुए व्यापक प्रदर्शनों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। देश की मुद्रा रियाल रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच चुकी है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, अब तक 2,600 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और लगभग 18,400 लोगों को हिरासत में लिया गया है। हाल ही में मारे गए सुरक्षाकर्मियों के सामूहिक अंतिम संस्कार में हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और पश्चिमी हस्तक्षेप के खिलाफ नारे लगाए। इन हालातों ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर बड़े टकराव के मुहाने पर ला खड़ा किया है। वीरेंद्र/ईएमएस/15जनवरी2026