राष्ट्रीय
15-Jan-2026


कमेटी का गठन व्यवस्था है या राजे के ट्रस्ट पर शिकंजा कसने की है तैयारी? दतिया,(ईएमएस)। देश के सबसे शक्तिशाली शक्तिपीठों में से एक दतिया की पीतांबरा पीठ अब प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गई है। राज्य सरकार ने मंदिर की व्यवस्थाओं और निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए संयुक्त कलेक्टर के नेतृत्व में पांच लोगों की एक समिति गठित की है। असल में प्रशासन की इस सक्रियता के पीछे हाल ही में हुई एक घटना बताई जा रही है। मंदिर में चल रहे विकास कार्यों में अचानक आठ पिलर गिर गए थे। गनीमत रही कि वह रास्ता बंद था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। प्रशासन को शिकायतें मिल रही थीं कि मंदिर से जुड़े कुछ लोग प्रोटोकॉल तोड़कर अपने करीबियों को बिना लाइन के दर्शन करवाते हैं, जिससे आम श्रद्धालु परेशानी होते हैं। पिलर गिरने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े किए, जिसे आधार बनाकर कलेक्टर ने समिति गठित की है। पीतांबरा पीठ ट्रस्ट की अध्यक्षता राजस्थान की पूर्व सीएम और बीजेपी की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे करती हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह समिति गठित करना असल में ट्रस्ट पर वसुंधरा राजे की पकड़ को कमजोर करना और शासन का होल्ड बढ़ाने की कोशिश है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर की स्वायत्तता पर सरकारी अंकुश लगाने की इस तैयारी से पीठ से जुड़े लोग और ट्रस्टी नाराज नजर आ रहे हैं। पीतांबरा पीठ दतिया के प्रबंधक महेश दुबे का कहना है कि पीताम्बरा पीठ अन्य मंदिरों की तरह केवल दर्शन का केंद्र नहीं है, यह एक सिद्ध साधना स्थली है, जहां जप-तप और अनुष्ठान की अपनी कठोर और गोपनीय परंपराएं हैं। ट्रस्ट का मानना है कि सरकारी समिति की मौजूदगी से साधकों की गोपनीयता और मंदिर की प्राचीन परंपराओं में बाधा आएगी। मंदिर प्रबंधन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि प्रशासन ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो वे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े का कहना है कि हमारा उद्देश्य ट्रस्ट के काम में हस्तक्षेप करना नहीं है। कमेटी का काम केवल यह सुनिश्चित करना है कि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण हों और दर्शन व्यवस्था दुरुस्त रहे। हम मंदिर के लोगों को भी इस कमेटी में शामिल करने को तैयार हैं। कानूनी विशेषज्ञ का तर्क है कि निजी या स्वायत्त ट्रस्टों में इस तरह प्रशासनिक समिति बनाना नियम विरुद्ध है और इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। बता दें पीतांबरा पीठ को राजसत्ता की देवी माना जाता है। यहां राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक शीश नवाते हैं। ट्रस्ट की कमान वसुंधरा राजे जैसी दिग्गज नेत्री के हाथ में है। ऐसे में चर्चा है कि क्या यह वास्तव में व्यवस्था सुधार है या फिर किसी बड़े राजनीतिक रसूख को कम करने की कोशिश? लोग और भक्त इसे मंदिर की स्वायत्तता छीनने का सरकारी ब्लूप्रिंट मान रहे हैं। सिराज/ईएमएस 15जनवरी26 ------------------------------------