अंतर्राष्ट्रीय
15-Jan-2026


बीजिंग,(ईएमएस)। चीन और जापान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच परमाणु हथियारों को लेकर फिर बहस तेज हुई है। चीन ने दावा किया है कि जापान के पास इतना प्लूटोनियम और तकनीकी क्षमता मौजूद है कि वह “करीब रातों-रात” परमाणु बम बना सकता है। चीन का यह दावा तब सामने आया है, जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन, ताइवान, उत्तर कोरिया और अमेरिका को लेकर रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। द्वितीय विश्वयुद्ध में हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमलों के बाद जापान ने परमाणु हथियारों से दूरी बनाए रखने का ऐतिहासिक फैसला किया था। जापान न केवल परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षरकर्ता है, बल्कि वह अपने “तीन गैर-परमाणु सिद्धांतों” का भी पालन करता रहा है...न परमाणु हथियार रखना, न बनाना और न ही अपने क्षेत्र में आने देना। लंबे समय तक यही नीति जापान की पहचान रही। हालांकि, हाल के वर्षों में हालात बदलते दिख रहे हैं। जिसके बाद जापान ने अपनी रणनीति बदली है। चीन की सैन्य शक्ति में तेज़ वृद्धि, ताइवान को लेकर आक्रामक बयानबाज़ी और उत्तर कोरिया के परमाणु व मिसाइल परीक्षणों ने जापान की सुरक्षा चिंताओं को गहरा किया है। 2022 में जापान ने अपनी नेशनल डिफेंस स्ट्रैटेजी में बदलाव कर लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता विकसित करने का निर्णय लिया, जिसे उसकी युद्धोत्तर रक्षा नीति में बड़ा मोड़ माना गया। इस बीच में चीन ने करीब 30 पन्नों की रिपोर्ट जारी कर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जापान की “न्यूक्लियर महत्वाकांक्षाओं” पर सख्त कदम उठाने की अपील की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जापान के पास उन्नत न्यूक्लियर फ्यूल साइकिल, री-प्रोसेसिंग तकनीक और हथियार-ग्रेड प्लूटोनियम निकालने की क्षमता है। चीन का दावा है कि जापान एनटीपी के तहत गैर-परमाणु देश होकर भी ऐसा करने की तकनीकी स्थिति में है, जो उस अन्य देशों से अलग बनाती है। रिपोर्ट में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के 2016 के उस बयान का भी हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जापान के पास बहुत कम समय में परमाणु हथियार बनाने की क्षमता है। हालांकि जापान सरकार ने बार-बार दोहराया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और उसकी सभी परमाणु गतिविधियां शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की यह रिपोर्ट सिर्फ सुरक्षा चिंता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को लेकर उसकी रणनीतिक बेचैनी को भी दर्शाती है। यदि जापान कभी परमाणु विकल्प पर गंभीरता से विचार करता है, तो यह पूर्वी एशिया की सुरक्षा संरचना को पूरी तरह बदल सकता है। आशीष दुबे / 15 जनवरी 2026