बिदर,(ईएमएस)। कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता, स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व मंत्री भीमन्या खंड्रे का शुक्रवार देर रात 102 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से उम्र से जुड़ी बीमारियों से पीड़ित थे। उनके निधन की जानकारी उनके पुत्र और कर्नाटक सरकार में वन मंत्री ईश्वर खंड्रे ने दी। उनके निधन से कर्नाटक, विशेषकर कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। भमन्या के बेटे ईश्वर खंड्रे के अनुसार, भीमन्या खंड्रे को पिछले 10 से 12 दिनों से सांस संबंधी परेशानी थी, जिसके चलते उन्हें बिदर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उनकी इच्छा के अनुसार इलाज भालकी स्थित उनके निवास पर जारी रखा गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। परिवार के सदस्य और समर्थक उनके अंतिम समय में उनके साथ मौजूद थे। भीमन्या खंड्रे कर्नाटक की राजनीति का एक महत्वपूर्ण और सम्मानित चेहरा थे। वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे और आजादी के बाद सामाजिक व राजनीतिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। वे कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के बड़े नेता माने जाते थे और सहकारिता आंदोलन में उनका विशेष योगदान रहा। वीरशैव लिंगायत समुदाय में उनकी गहरी पैठ थी और वे एक प्रभावशाली जननेता के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने वीरप्पा मोइली के नेतृत्व वाली सरकार में कर्नाटक के परिवहन मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। पेशे से वकील रहे भीमन्या खंड्रे ने वर्ष 1953 में भालकी नगर पालिका के पहले निर्वाचित अध्यक्ष बनकर सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। इसके बाद वे 1962 में पहली बार विधानसभा के सदस्य बने और चार बार विधायक चुने गए। इसके अलावा वे दो बार विधान परिषद के सदस्य भी रहे। सहकारिता क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। वे हल्लिखेड़ा स्थित बिदर सहकारी शुगर फैक्ट्री और हुंजी की महात्मा गांधी शुगर फैक्ट्री के संस्थापक अध्यक्ष रहे। साथ ही नरांजा और करांजा सिंचाई परियोजनाओं के क्रियान्वयन में भी उनकी अहम भूमिका रही, जिससे क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ मिला। भीमन्या खंड्रे के निधन पर राजनीतिक, सामाजिक और सहकारिता जगत की कई हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है और उन्हें एक दूरदर्शी नेता, सरल व्यक्तित्व और जनसेवक के रूप में याद किया जा रहा है। हिदायत/ईएमएस 17जनवरी26