- सरकार कोई बड़े और चौंकाने वाले सुधारों की घोषणा नहीं करेगी नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय शेयर बाजार यह मानकर चल रहे हैं कि केंद्रीय बजट 2026 में सरकार कोई बड़े और चौंकाने वाले सुधारों की घोषणा नहीं करेगी। यह बजट रविवार, 1 फरवरी 2026 को पेश किया जाएगा। विश्लेषकों के मुताबिक सरकार का मुख्य जोर लोकलुभावन उपायों की बजाय राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने पर रहेगा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि प्रत्यक्ष करों से जुड़े अहम बदलाव पिछले बजट में किए जा चुके हैं, जबकि जीएसटी से जुड़े सुधार सितंबर 2025 से लागू हो चुके हैं। ऐसे में बजट 2026 में बड़े टैक्स बदलावों की संभावना कम है। सरकार सीमित संसाधनों में संतुलित खर्च की नीति अपना सकती है। अनुमान है कि सरकार वित्त वर्ष 27 में फिस्कल डेफिसिट को जीडीपी के करीब 4.2 फीसदी तक सीमित रखने की कोशिश करेगी। टैक्स से सीमित आय वृद्धि को देखते हुए सरकार डिसइन्वेस्टमेंट के जरिए संसाधन जुटा सकती है। रक्षा, रेलवे, इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई सेक्टर में पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) बढ़ाने की संभावना जताई जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार सरकार का फोकस आर्थिक स्थिरता और सुधारों पर रहेगा। पीएलआई स्कीम को आगे बढ़ाने, एमएसएमई और निर्यातकों को राहत देने तथा नियमों को सरल बनाने के कदम उठाए जा सकते हैं। एक अर्थशास्त्री का मानना है कि रक्षा खर्च में 12–15 फीसदी और कोर इंफ्रास्ट्रक्चर में 8–10 फीसदी तक बढ़ोतरी संभव है। बैंक आफ अमेरिका का कहना है कि सरकार वित्त वर्ष 27 से कर्ज प्रबंधन पर ज्यादा ध्यान दे सकती है और कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को 55 फीसदी तक लाने का लक्ष्य तय कर सकती है। कुल मिलाकर, बजट 2026 को लेकर बाजार की उम्मीदें स्थिरता, अनुशासन और दीर्घकालिक विकास पर टिकी हुई हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा बना रह सकता है। सतीश मोरे/19जनवरी ---