इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट ने जल और वायु के प्रदूषण को लेकर कतिपय फैक्टियों द्वारा किए जा रहे अधिनियम के उल्लंघन पर स्वत संज्ञान याचिका की सुनवाई करते सक्षम प्रदूषण अनुमति लिए बिना संचालित हो रही औद्योगिक इकाइयों के मामले को गंभीर बताते हुए मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभागों द्वारा समन्वित और त्वरित कार्रवाई कराई जाए तथा इस प्रकरण के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को केस का प्रभारी नियुक्त किया जाए। कोर्ट ने कहा कि यह मामला मप्र जल प्रदूषण निवारण अधिनियम और वायु प्रदूषण निवारण अधिनियम के खुले उल्लंघन से जुड़ा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। कोर्ट ने टिप्पणी करते पूछा कि इस प्रकरण में मुख्य सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग, उद्योग विभाग के प्रमुख सचिवों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किए थे, लेकिन केवल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ही जवाब दाखिल किया? और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जिन इकाइयों की अनुमति समाप्त हो चुकी है, उनमें बड़ी संख्या में अस्पताल, क्लीनिक, खनन इकाइयां और स्टोन क्रशर शामिल है। इनमें से अधिकांश इकाइयां रेड और ऑरेंज श्रेणी की हैं, जो अधिक प्रदूषण फैलाने वाली मानी जाती है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कोर्ट को बताया गया कि अब बिना अनुमति वाली इकाइयों की संख्या 5961 से घटकर 4877 रह गई है। 9 जनवरी तक की जांच में कई इकाइयां बंद पाई गईं। यह सत्यापन प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी होने की संभावना है। माइनिंग और क्रशर ईकाइयां खनन लीज समाप्त होने या पर्यावरणीय स्वीकृति न होने से पहले ही बंद की जा चुकी है सिर्फ पोर्टल पर आंकड़ों को अपडेट करना बाकी है। वहीं उप महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्हें बोर्ड की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे वे पक्ष नहीं रख सके। इस पर कोर्ट ने रिपोर्ट की प्रति महाधिवक्ता को तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश देते सुनवाई की अगली तारीख 9 फरवरी नियत कर दी। आनंद पुरोहित/ 19 जनवरी 2026