* छात्रों के साथ नाश्ता, ग्रामीणों संग सफाई अभियान, वृक्षारोपण, पुस्तक विमोचन और प्राकृतिक खेती पर किसानों से संवाद बनासकांठा (ईएमएस)| जिले के विरमपुर गांव की यात्रा के दौरान राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कन्या साक्षरता आवासीय विद्यालय की सरकारी प्राथमिक शाला में सादगीपूर्ण रात्रि प्रवास कर सादगी, संवेदनशीलता और ग्रामीण जीवन के प्रति अपनी गहरी भावना व्यक्त की। प्रातःकाल राज्यपाल ने विरमपुर के ग्रामीणों के साथ स्वच्छता अभियान के अंतर्गत स्वयं झाड़ू लगाकर सफाई की और स्वच्छता के प्रति जनजागृति का संदेश दिया। इसके पश्चात उन्होंने विद्यालय परिसर की कैंटीन में विद्यार्थियों के साथ बैठकर नाश्ता किया तथा छात्रों को पढ़-लिखकर गुजरात और देश का नाम रोशन करने की प्रेरणा दी। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का महत्व रेखांकित किया। इस अवसर पर उनके करकमलों से विद्यामंदिर एवं प्रशिक्षण भवन का लोकार्पण भी किया गया। संवेदना ट्रस्ट द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल का उत्साहपूर्वक स्वागत किया गया। नन्हे बच्चों के स्नेहिल स्वागत से संपूर्ण वातावरण आनंदमय और उल्लासपूर्ण बन गया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने आदिवासी महिलाओं द्वारा जंगल की जड़ी-बूटियों से निर्मित साबुन के स्टॉल तथा प्राकृतिक खेती के स्टॉल का अवलोकन कर उनकी सराहना की। इस अवसर पर राज्यपाल के करकमलों से “निष्काम कर्मयोगी शंकरभाई पटेल” पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जिसमें उनके निष्काम सेवा भाव और समाज के प्रति योगदान को उजागर किया गया है। राज्यपाल ने कहा कि संवेदना ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इस क्षेत्र के जीवन में परिवर्तन लाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने हसमुख पटेल, शंकर पटेल तथा उनकी पूरी टीम द्वारा आदिवासी भाई-बहनों के जीवन को समर्पित सेवा की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से पूरे क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आया है। शिक्षा को समाज की प्रगति का मूल आधार बताते हुए राज्यपाल ने शिक्षणधाम की व्यवस्था में योगदान देने वाले भगु पटेल और मीनाक्षीबहन को बधाई दी। “मैं नहीं, बल्कि सभी सुखी रहें” - इस वैदिक विचारधारा से जन्मी मानवता को ईश्वर-प्राप्ति का सच्चा मार्ग बताते हुए, इस दिशा में निष्ठापूर्वक कार्य करने के लिए उन्होंने संपूर्ण संवेदना ट्रस्ट की प्रशंसा की। किसानों से प्राकृतिक खेती पर संवाद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती सूक्ष्म जीवाणुओं की खेती है। यदि जीवामृत छायादार स्थान या पेड़ के नीचे तैयार किया जाए तो उसमें मौजूद बैक्टीरिया लंबे समय तक सक्रिय रहते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जंगल में कोई यूरिया खाद नहीं डालता, फिर भी वहां पेड़ हरे-भरे रहते हैं। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती की शुरुआत में एक एकड़ भूमि में कम से कम दो टन ठोस जीवामृत देना अत्यंत आवश्यक है, जिससे उत्पादन घटता नहीं बल्कि बढ़ता है और बंजर भूमि भी उपजाऊ बनती है। राज्यपाल ने किसानों को चरणबद्ध रूप से प्राकृतिक खेती अपनाने, मल्चिंग और मल्टीक्रॉप पद्धति से एक साथ एक से अधिक फसल लेने की सलाह दी। साथ ही अग्निअस्त्र, नीमास्त्र और खट्टी छाछ के उपयोग पर विशेष जोर दिया। राज्यपाल ने कहा कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है और भूमि लंबे समय तक जीवंत रहती है। आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अनिवार्य बताते हुए उन्होंने तालुका स्तर पर प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए अलग बाजार व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लगातार तीन वर्षों तक प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सरकार की ओर से विशेष सहायता दी जाएगी और दृढ़ता से कहा - “भविष्य प्राकृतिक खेती का है।” कार्यक्रम में पूर्व मंत्री भूपेंद्रसिंह चुडासमा, संवेदना ट्रस्ट के पदाधिकारी हसमुख पटेल, जीतू पटेल, ज्योति ट्रस्ट के सचिव डॉ. मिहिर जोशी, गुजरात विद्यापीठ के कुलपति डॉ. हर्षद पटेल सहित राज्य और क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में भाई-बहन उपस्थित रहे। सतीश/19 जनवरी