* राजकोट में आरएसएस प्रमुख का युवाओं से संवाद, ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से राष्ट्रहित में योगदान का आह्वान राजकोट (ईएमएस)| राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने राजकोट का दौरा कर सेवाभारती भवन में सौराष्ट्र–कच्छ के युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं को संघ की कार्यपद्धति और विचारधारा की जानकारी दी तथा ‘पंच परिवर्तन’ के विषयों के माध्यम से राष्ट्रहित में योगदान देने का आह्वान किया। डॉ. भागवत ने कहा कि आज बहुत से लोग संघ को समझने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन केवल इंटरनेट या विकिपीडिया से संघ को नहीं समझा जा सकता। संघ को सही रूप में समझने के लिए संघ साहित्य का अध्ययन आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे संघ साहित्य पढ़कर संघ को जानने और समझने का प्रयास करें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में बहनों की भागीदारी रही, जिन्होंने मातृशक्ति जागरण का संकल्प व्यक्त किया। युवाओं को संबोधित करते हुए सरसंघचालक ने कहा कि जब युवा विभिन्न क्षेत्रों में देश के लिए कार्य कर रहे हैं, तब उनके मन में यह स्पष्ट होना चाहिए कि देश क्या है। उन्होंने कहा कि पंच परिवर्तन के विषयों पर कार्य कर प्रत्येक नागरिक देशहित में योगदान दे सकता है। डॉ. भागवत ने कहा कि हम अपने देश को भारत माता कहते हैं। यह केवल भूमि का एक टुकड़ा नहीं है, इसका विभाजन नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह भावनाओं से जुड़ा हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का लक्ष्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है। जैसे ब्रिटेन में ब्रिटिश और अमेरिका में अमेरिकन कहलाते हैं, वैसे ही हिंदुस्तान में रहने वाले हिंदू हैं। भारत और हिंदुस्तान अलग नहीं, बल्कि एक ही हैं। उन्होंने कहा कि एकता के साथ चलने का स्वभाव ही हिंदू समाज की पहचान है और हमारी भावना ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की रही है। आज हिंदू समाज को तोड़ने के लिए अनेक षड्यंत्र चल रहे हैं, जबकि हिंदू आदिकाल से इस भूमि पर रहते आए हैं। देश को शक्तिशाली और विकसित बनाने की जिम्मेदारी सभी समाजों की है। सरसंघचालक ने बताया कि विश्व कल्याण के उद्देश्य से देश को आगे बढ़ाने हेतु संघ निरंतर कार्य कर रहा है। संघ की शाखाओं के माध्यम से श्रेष्ठ और निष्ठावान स्वयंसेवक तैयार किए जाते हैं, जो समर्पण भाव से सेवा कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि संघ को सही मायने में समझने के लिए संघ के साथ जुड़ना आवश्यक है। डॉ. भागवत ने नागरिकों से राष्ट्रहित में योगदान देने की अपील करते हुए कहा कि देश का भाग्य बदलने के लिए सभी समाजों का योगदान आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सभी लोग शाखा में नहीं आ सकते, इसी को ध्यान में रखते हुए संघ ने ‘पंच परिवर्तन’ की अवधारणा प्रस्तुत की है। * पंच परिवर्तन के पांच विषय इस प्रकार हैं: - सामाजिक समरसता - कुटुंब प्रबोधन - पर्यावरण संरक्षण – जल बचाओ, प्लास्टिक हटाओ, वृक्ष लगाओ - स्वबोध और स्वदेशी - नागरिक कर्तव्य इन पांच क्षेत्रों में कोई भी नागरिक छोटे-बड़े कार्य करके देशहित में योगदान दे सकता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर नागपुर के मोहिते वाड़ा से की गई थी। संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ‘पंच परिवर्तन’ के विषयों को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए डॉ. मोहन भागवत देशभर में प्रवास कर रहे हैं। सतीश/20 जनवरी