ग्वालियर ( ईएमएस) । वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ग्वालियर श्री धर्मवीर सिंह(भापुसे) के निर्देष पर ग्वालियर पुलिस द्वारा फरार इनामी आरोपियों के विरूद्ध जिले में प्रभावी कार्यवाही की जा रही है। उक्त कार्यवाही के दौरान दिनांक 19.01.2026 को एसडीओपी बेहट को जरिये मुखबिर सूचना प्राप्त हुई कि थाना बिजौली के 189/25 अंतर्गत धारा 80, 85, 3(5) बीएनएस एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में फरार इनामी आरोपीगण थाना जनकगंज क्षेत्र में बेलदार का पुरा में छिपे हुए हैं। उक्त सूचना से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया, जिस पर अति. पुलिस अधीक्षक (पूर्व) ग्वालियर श्रीमती विदिता डागर(भापुसे) द्वारा मुखबिर सूचना की तस्दीक कर इनामी आरोपीगणों के खिलाफ कार्यवाही हेतु निर्देषित किया गया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देषानुसार एसडीओपी बेहट श्री मनीष यादव(रापुसे) के कुषल मार्गदर्शन में व नेतृत्व में गठित पुलिस टीम को मुखबिर के बताये स्थान पर भेजा गया। पुलिस द्वारा थाना जनकगंज क्षेत्र में बेलदार का पुरा से उक्त प्रकरण में फरार इनामी आरोपी ससुर पूरन सिंह जाटव एवं सास नर्मदा जाटव निवासीगण रामनगर ओडपुरा थाना बिजौली जिला ग्वालियर को अभिरक्षा में लिया गया। उक्त दोनों आरोपीगण घटना दिनांक से फरार चल रहे थे जिनकी गिरफ्तार पर पुलिस अधीक्षक ग्वालियर द्वारा 02-02 हजार का इनाम घोषित किया गया था। ज्ञात हो कि दिनांक 23.09.2025 को श्रीमती नेहा जाटव पत्नी कुलदीप जाटव, उम्र 22 वर्ष, निवासी ग्राम रामनगर, थाना बिजौली की आग से झुलसने के कारण उपचार के दौरान मृत्यु हो गई थी। उक्त घटना पर थाना बिजौली में मर्ग क्रमांक 23/25 धारा 194 बीएनएस कायम कर जांच प्रारंभ की गई। मृतिका नव-विवाहिता होने से मर्ग की जांच एसडीओपी बेहट द्वारा की गई। मर्ग जांच के दौरान मृतिका के मायके पक्ष के परिजनों के कथन एवं संकलित साक्ष्यों से यह तथ्य प्रकाश में आया कि मृतिका के पति कुलदीप जाटव, ससुर पूरन सिंह जाटव एवं सास नर्मदा जाटव द्वारा दहेज में कम राशि लाने तथा अतिरिक्त 1,00,000/- रू(एक लाख रुपये) की मांग को लेकर उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। दहेज की मांग पूरी न होने पर मृतिका को आग लगाकर मार डालना पाया गया। मर्ग जांच उपरांत प्राप्त तथ्यों के आधार पर आरोपीगण पूरन सिंह जाटव, नर्मदा जाटव एवं कुलदीप जाटव, निवासीगण ग्राम रामनगर/ओड़पुरा, थाना बिजौली के विरुद्ध थाना बिजौली में अपराध क्रमांक 189/25 अंतर्गत धारा 80, 85, 3(5) बीएनएस एवं 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।