दो डॉक्टरों पर फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने के गंभीर आरोप भोपाल (ईएमएस)। फर्जी अस्पतालों और अवैध नर्सिंग कॉलेजों पर शिकंजा कसने के मामले में स्वास्थ्य विभाग कटघरे में खडा हो गया है। फर्जी संस्थानों की जांच की जिम्मेदारी जिस टीम को सौंपी गई थी, उसी टीम के दो डॉक्टरों पर फर्जी निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने के गंभीर आरोप लगे हैं। उक्त मामला राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय तक पहुंच गया है। इस गंभीर मामले में एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रितेश रावत और चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक सेन ने एनआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग भोपाल और उससे संबद्ध अरनव अस्पताल की वैधता को लेकर मौके पर वास्तविक निरीक्षण किए बिना ही भ्रामक और कूटरचित रिपोर्ट तैयार कर दी। आरोप है कि इस रिपोर्ट के जरिए शासन और मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल को गुमराह करने का प्रयास किया गया। एनएसयूआई की ओर से इस मामले की शिकायत राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय में दर्ज कराई गई थी। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए साइबर पुलिस ने डीसीपी क्राइम को पत्र भेजकर पूरे मामले की जांच करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इससे स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप की स्थिति बन गई है। पूरा मामला करीब एक महीने पुराना बताया जा रहा है। एनआरआई इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग और उससे संबद्ध अस्पताल की वैधता को लेकर एनएसयूआई ने पहले मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद काउंसिल के रजिस्ट्रार ने सीएमएचओ भोपाल को निर्देश दिए थे कि संस्थान का निरीक्षण कर दस्तावेजों सहित विस्तृत प्रतिवेदन काउंसिल कार्यालय में प्रस्तुत किया जाए। इन निर्देशों के बाद सीएमएचओ भोपाल डॉ. मनीष शर्मा ने जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. रितेश रावत और चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक सेन को निरीक्षण की जिम्मेदारी सौंपी, लेकिन आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने स्थल पर जाकर वास्तविक स्थिति देखे बिना ही रिपोर्ट तैयार कर दी और उसे प्रस्तुत कर दिया। एनएसयूआई जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद 12 दिसंबर 2025 को सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने दोनों डॉक्टरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद आज तक कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई। उनका कहना है कि यह देरी साफ तौर पर यह संकेत देती है कि भ्रष्ट अधिकारियों को विभागीय स्तर पर संरक्षण मिल रहा है। एनएसयूआई का दावा है कि कार्रवाई में हो रही देरी के कारण राजधानी में फर्जी अस्पतालों और अवैध नर्सिंग कॉलेजों का नेटवर्क लगातार सक्रिय है। संगठन का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह पूरा खेल संभव नहीं है। सुदामा नरवरे/22 जनवरी 2026