अंतर्राष्ट्रीय
22-Jan-2026
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ढाका,(ईएमएस)। क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर एक बेहद चिंताजनक खुलासा हुआ है, जिसमें बताया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने भारत के खिलाफ अपनी साजिशों को अंजाम देने के लिए अब बांग्लादेश को एक प्रमुख गेटवे के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश की पहचान अब पाकिस्तान के सीक्रेट मिशनों के केंद्र के रूप में होने लगी है। रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामाबाद ने अपने अधिकांश डर्टी वर्क और भारत विरोधी अभियानों को अब बांग्लादेश की ओर री-डायरेक्ट कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के लॉजिस्टिक और वैचारिक आधार के रूप में इस्तेमाल होने की परोक्ष अनुमति दे दी है। इससे ढाका अब भारत के खिलाफ रची जा रही साजिशों में एक मूक भागीदार की भूमिका निभा रहा है। विशेष रूप से भारत के गणतंत्र दिवस समारोहों के आसपास क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए आईएसआई ने प्रॉक्सी जिहाद का एक घातक खेल सक्रिय कर दिया है। यह साजिश केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पश्चिम बंगाल से लेकर विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों तक को निशाना बनाने की योजना शामिल है। खुफिया जानकारी के अनुसार, आईएसआई की ढाका सेल सीधे तौर पर प्रशिक्षित घुसपैठियों के समन्वय का काम देख रही है। इस मिशन के लिए मोहाजिर रेजिमेंट नामक एक विशेष इकाई तैयार की गई है, जिसमें 18 से 40 वर्ष की आयु के पुरुष और महिला ऑपरेटिव शामिल हैं। इन प्रशिक्षित आतंकियों को भारत-बांग्लादेश सीमा के जरिए भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ कराने की योजना है। इनमें से कई ऑपरेटिव आईईडी बनाने और आत्मघाती हमलों को अंजाम देने में माहिर हैं। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि 2024 में बांग्लादेश में हुए सत्ता परिवर्तन और वैचारिक रियायतों ने कट्टरपंथी इस्लामी नेटवर्क के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार कर दिया है। इसके चलते लश्कर-ए-तैयबा और बांग्लादेश के स्थानीय कट्टरपंथी संगठनों के बीच के वे संबंध फिर से जीवित हो गए हैं जो वर्षों से निष्क्रिय पड़े थे। लश्कर के संस्थापक हाफिज सईद के पुराने नेटवर्क, जिनमें मुफ्ती हारून इजहार और मुफ्ती जशिमुद्दीन रहमानी जैसे कट्टरपंथी शामिल हैं, अब फिर से सक्रिय होकर भारत विरोधी गतिविधियों को खाद-पानी दे रहे हैं। यह स्थिति न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की शांति के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है। वीरेंद्र/ईएमएस 22 जनवरी 2026