अंतर्राष्ट्रीय
22-Jan-2026


दावोस (ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच में अपने नेतृत्व और नीतियों का बचाव कर खुद को दुनिया का सबसे बड़ा तानाशाह बताया। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें अक्सर तानाशाह कहा जाता है और उन्होंने सीधे स्वीकार किया कि “हां, मैं तानाशाह हूं। लेकिन कभी-कभी तानाशाह की आवश्यकता होती है। उन्होंने अपने निर्णयों को विचारधारा से कम और व्यावहारिकता और सामान्य ज्ञान पर आधारित बताया। उनका दावा था कि उनके फैसले लगभग 95 प्रतिशत सामान्य ज्ञान पर आधारित हैं। ट्रंप ने अपने भाषण में कहा कि उनकी बयानबाजी अक्सर गलत समझी जाती है। उन्होंने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के प्रति अपने सम्मान की बात कही और ग्रीनलैंड की रक्षा के लिए अमेरिका की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि लोगों को लगता था कि वह बल प्रयोग करेंगे, लेकिन उन्होंने इसे स्पष्ट किया कि ऐसा कोई इरादा नहीं है। अमेरिका की आर्थिक शक्ति और वैश्विक समृद्धि पर भी ट्रंप ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका दुनिया का आर्थिक इंजन है और यहां के प्रतिभाशाली लोगों की सुरक्षा बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने नाटो सहयोगियों पर शुल्क, पर्यावरण और आव्रजन जैसे मुद्दों पर तीखा हमला किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका द्वारा वसूले गए शुल्क का पैसा देश और नागरिकों के हित में इस्तेमाल किया जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका आर्थिक रूप से मजबूत होने पर पूरी दुनिया भी लाभान्वित होती है। ट्रंप ने अपने शासन की उपलब्धियों को बताते हुए कहा कि अमेरिका दो साल पहले “मृत” हालत में था, लेकिन अब यह फिर से जीवित और मजबूत बन गया है। उन्होंने भविष्य में छह महीनों में देश द्वारा कमाई जाने वाली राशि का अनुमान भी साझा किया, जो पिछले छह वर्षों की तुलना में अधिक होगी। उनका 70 मिनट का भाषण व्यापक विषयों पर आधारित था, जिसमें 20 मिनट का प्रश्नोत्तर सत्र भी शामिल था। ट्रंप ने अपने दृष्टिकोण को साफ करते हुए कहा कि उनके फैसले अक्सर विवादित लग सकते हैं, लेकिन उनका मकसद हमेशा अमेरिका और उसके लोगों का हित सुनिश्चित करना है। आशीष दुबे / 22 जनवरी 2026