अंतर्राष्ट्रीय
22-Jan-2026


दावोस (ईएमएस)। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने यूरोप और दुनिया के सामने अमेरिका और वैश्विक नेतृत्व पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, जिसके पास शक्ति कम है, उसकी शक्ति ईमानदारी है, जिससे लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। कार्नी ने बताया कि यह संक्रमण का समय नहीं है, बल्कि यह व्यवस्थाओं के टूटने और नई चुनौतियों का समय है। उन्होंने सुपर पावर और मिडिल पावर देशों की भूमिका और उनके इतिहास की तुलना कर वैश्विक झूठों और असंतुलन को उजागर किया। कनाडाई पीएम कार्नी ने स्पष्ट किया कि कनाडा भी अमेरिकी नेतृत्व वाली बहुपक्षीय व्यवस्था का हिस्सा रहा है, जिसने खुले समुद्री मार्ग, स्थिर वित्तीय प्रणाली और सामूहिक सुरक्षा जैसी सुविधाएँ प्रदान की हैं। हालांकि, इस व्यवस्था के तहत कुछ वास्तविकताएँ नजरअंदाज की गईं। अब वह युग खत्म हो चुका है, टैरिफ़ और वित्तीय ढाँचे दबाव के साधन बन गए हैं, और आप किसी भी एकीकरण के पीछे छिपे लाभ के झूठ में नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि शक्तिशाली देशों के पास उनकी शक्ति है, लेकिन कम शक्तिशाली देशों के पास ईमानदारी, वास्तविकता को नाम देने और अपने घर में शक्ति बनाने की ताकत होती है। कनाडा ने यह रास्ता चुना है और इसे खुलेपन और आत्मविश्वास के साथ अपनाया है। यह रास्ता उन देशों के लिए भी खुला है जो इसी सिद्धांत को अपनाने को तैयार हैं। कार्नी का भाषण इसलिए ऐतिहासिक माना गया क्योंकि उन्होंने वह सच कह दिया जो दिखाई दे रहा था लेकिन किसी ने बोलने की हिम्मत नहीं की। उनके शब्द अमेरिका और यूरोप के बीच असंतुलन, बहुपक्षीय संस्थानों की भूमिका और वैश्विक शक्ति संरचना पर एक नए दृष्टिकोण को सामने लाते हैं। टैरिफ़ को दबाव के औजार के रूप में, वित्तीय ढाँचों को जबरदस्ती के साधन के रूप में और सप्लाई चेन के दोहन योग्य कमज़ोरियों के रूप में। जब एकीकरण ही आपकी अधीनता का स्रोत बन जाए, तब आप पास्परिक लाभ के झूठ के भीतर नहीं जी सकते। दिखावा बंद करने की क्षमता, वास्तविकताओं को नाम देने की क्षमता, अपने घर में अपनी ताक़त बनाने की क्षमता और मिलकर कार्रवाई करने की क्षमता। आशीष दुबे / 22 जनवरी 2026