हिंदू धर्म में शंकराचार्य का पद आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार प्रमुख पीठों (ज्योतिर्मठ, द्वारका, पुरी और शृंगेरी) के प्रमुखों का है, जो अद्वैत वेदांत और सनातन धर्म के संरक्षक माने जाते हैं। यह पद पूरी तरह से धार्मिक है, लेकिन यह पद बार-बार राजनीतिक विवादों का केंद्र बनता रहा है।इन विवादों में पीठ के उत्तराधिकार झगड़े, धार्मिक बयानों का राजनीतिक उपयोग, सरकारी हस्तक्षेप और राजनीतिक दलों से जुड़ाव प्रमुख कारण रहे है। ये विवाद धार्मिक स्वायत्तता बनाम राजनीतिक प्रभाव का कारण बनते हैं। राजनेताओं ने संतो को सम्मान व समर्थन के बदले अपने वोट बैंक में बढ़ोतरी की चाह रखी है।इतना भर तो ठीक था,लेकिन विगत18-19 जनवरी 2026 को प्रयागराज के माघ मेला में मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को त्रिवेणी संगम में स्नान के लिए उनकी पालकी को जाने से रोका गया। पुलिस ने भीड़ और अनुमति का हवाला दिया, जिससे शंकराचार्य के शिष्यों के साथ पुलिस की झड़प हो गई।गुस्साए पुलिस कर्मियों ने शंकराचार्य के शिष्यों के साथ जमकर दुर्व्यवहार किया।विवाद बढने पर मेला प्रशासन ने संतो से क्षमा याचना करने व दोषी पुलिस कर्मियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के बजाए 20 जनवरी को 24 घंटे का नोटिस शंकराचार्य को जारी कर दिया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सन 2022 के आदेश का हवाला देकर पूछा गया कि वे शंकराचार्य शब्द शीर्षक कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि उनके उत्तराधिकार मामला कोर्ट में है।इस नोटिस से नाराज़ होकर शंकराचार्य ने अनशन शुरू कर दिया और कहा कि न मुख्यमंत्री, न राष्ट्रपति शंकराचार्य यह तय कर सकते हैं कि शंकराचार्य कौन है और कौन नही?इसके बाद मामले को लेकर राजनीति शुरू हो गई है।इस मुद्दे पर कांग्रेस उत्तर प्रदेश सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस ने इसे भाजपा का धर्मद्रोह और साधुओं का अपमान करना बताया है।कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि स्वामी को निशाना बनाया गया क्योंकि उन्होंने राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा, केदारनाथ में 228 किलो सोने की चोरी और कोविड के समय में गंगा में तैरते शवों पर सवाल उठाए थे। जबकि भाजपा ने इसे प्रशासनिक मुद्दा कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। वही शंकराचार्य के समर्थकों ने इसे राजनीतिक साजिश बताया है।समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार जानबूझकर शंकराचार्यों और संतों का अपमान कर रही है और सनातन परंपराओं को तोड़ रही है।उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने अखिलेश यादव ने कहा कि शंकराचार्य और संत, समाज के गर्व हैं और अनगिनत श्रद्धालु आशीर्वाद लेने उनके पास जाते हैं जो सनातन धर्म की परंपराओं का हिस्सा है।उन्होंने आरोप लगाया, “भाजपा इन परंपराओं को तोड़ रही है। संतों और शंकराचार्यों का जानबूझकर अपमान किया जा रहा है। भाजपा सरकार ने अपने अधिकारियों के जरिए शंकराचार्यों के साथ दुर्व्यवहार किया है।”हालांकि उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद महाराज से उनके अपमान को लेकर माफी मांगते हुए उनसे ससम्मान गंगा स्नान करने व विवाद समाप्त करने की अपील की है,लेकिन संत होते हुए भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उक्त मुद्दे पर चुप्पी को लेकर आमजन में आक्रोश व्याप्त है।इस मुद्दे पर योगी सरकार से नाराज़ भाजपा के कुछ लोगो ने पार्टी छोड़ने का भी ऐलान किया है।(लेखक ज्वलंत मुद्दों के जानकार वरिष्ठ साहित्यकार है) ईएमएस / 23 जनवरी 26