भोपाल(ईएमएस)। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में वसंत पंचमी के उपलक्ष में सरस्वती पूजन संपन्न हुई। साथ ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती भी मनाई गई। भारतीय चित्रकला विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में अधिष्ठाता प्रो. नवीन कुमार मेहता ने सरस्वती पूजन संपन्न कराया। विश्वविद्यालय के भारतीय दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. नवीन दीक्षित ने सरस्वती पूजन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा में परा और अपरा विद्या को परिभाषित किया। उन्होंने बताया कि वैदिक काल से ही सरस्वती उपासना के प्रमाण मिलते हैं। डॉ. दीक्षित ने बताया कि इसीलिए इसे सिंधु-सरस्वती सभ्यता कहा जाने लगा। डॉ. दीक्षित ने कहा कि बचपन से ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्श स्वामी विवेकानंद थे। नेताजी के आध्यात्मिक सफर के बारे में डॉ. दीक्षित ने बताया कि स्वामी विवेकानंद और स्वामी अरबिंदो ने उन्हें बेहद प्रभावित किया था। वे रामकृष्ण मिशन और अरबिंदो आश्रम में जाते थे। प्रो. नवीन कुमार मेहता ने अपने वकतव्य में बताया कि नेताजी ने चयन होने के बाद भी आई.सी.एस की नौकरी को ठुकरा दिया था क्योंकि वो अंग्रेज़ों की गुलामी नहीं करना चाहते थे। बाद में नेताजी ने ही अंग्रेज़ों के खिलाफ आज़ाद हिंद फौज का गठन किया था। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. वैद्यनाथ लाभ एवं कुलसचिव प्रो. आर.एन गुप्ता ने सभी को वसंत पंचमी और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर बधाई दी। कार्यक्रम में अकादमिक एवं प्रशासनिक अधिकारियों के साथ छात्रों ने भी जमकर हिस्सा लिया। हरि प्रसाद पाल / 23 जनवरी, 2026