क्षेत्रीय
23-Jan-2026


छिंदवाड़ा जबलपुर (ईएमएस)। कृषि उपज मंडी में अनाज की व्यवस्था बनाने में अपना पसीना बहाने वाले हम्माल और तुलावटियों की हालात अच्छी नहंी है। मंडी में इनसे मनमर्जी से काम लिया जा रहा है। मंडी में हम्माल और तुलावटियों का दोनों का अलग-अलग काम है लेकिन इस समय सब गड़बडझाला चल रहा है। कुछ तुलावटी खाली बैठे हैं तो कुछ हम्माल अनाज तोलने का काम कर रहे हैं। कुछ व्यापारियों ने अपने ही कर्मचारियेां के तुलावटी के लाइसेंस बनवा दिए हैं। ऐसे में कई जरूरतमंद कामगारों की रोजी-रोटी छिनी जा रही है। इस समय मंडी में ज्यादातर हम्माल और तुलावटियों के पास लाइसेंस नहीं है। यही वजह है कि वे अपनी आवाज भी उठा नहीं पा रहे हैं। 3 हजार से ज्यादा मजदूर इस समय कुसमेली स्थित कृषि मंडी परिसर में 3 हजार से ज्यादा मजदूर काम कर रहे हैं। इसमें हम्माल और श्रमिक दोनेां है। इसमें से मुश्किल से उेढ सौ के पास इस काम का पंजीयन है। इनकी मियाद भी खत्म होने वाली है। मंडी एक्ट के अनुसार मंडी में काम करने वाले श्रमिकों का पंजीयन होना जरूरी है लेकिन छिंदवाड़ा में ऐसा न होने के कारण ये मजूदर जहां सरकार की योजनाओ से वंचित है वहीं अपने हक के लिए आवाज भी नहीं उठा रहे। इसी का फायदा व्यापारी उठा रहे हैं। हम्माल और तुलावटियों के काम के भुगतान की अलग-अलग दरें हैं। वाजिब रोजगार और मानदेय भी वे नहीं मांग पा रहे हैं और शोषण का शिकार हो रहे हैं। मजदूरों में भी एका नहीं छिंदवाड़ा कृषि उपज मंडी में काम करने वाले श्रमिक भी गुटों में बंटे हैं। एक गुट आवाज उठाता है लेकिन दूसरे गुट साथ नहीं देते। वर्तमान में मजदूर संघ है लेकिन लगभग निष्क्रिय हैं। मजूदर संघ के अध्यक्ष अनिल उइके का कहना पड़ा कि कई बार अपनी बात को व्यापारियेां तक और मंडी प्रबंधक तक भी पहुंचाई जाती है लेकिन कोई उचित पहल होती नहीं दिख रही। वे भी मानते हैं कि यहां के कामगारों में एकता नहीं है। मंडी प्रबंधन अब लगाएगा शिविर मंडी प्रबंधन अब हम्माल और तुलावटियों के लाइसेंस बनाएगा। पांच साल पहले बने लाइसेंसों की मियाद खत्म हो चुकी है। मंडी प्रबंधन अब परिसर में काम करने वाले हम्मला और श्रमिकों के लिए मंडी में ही शिविर लगाएगा। इसके लिए सभी कामगारों को सूचना दी गई है। मंडी अधिकारियेां का कहना है कि तुलावटी और हम्मालों काकाम बंटा हुआ है। लाइसेंस बनने के बाद मंडी प्रबंधन खुद इन हम्मालों और तुलावटियो को काम का बंटवारा करेगा। लाइसेंस मिलने के बाद मजूदर खुद भी अपने अधिकारों के प्रति सजग हो सकेंगे। इनका कहना है मंडी में कई तुलावटी ऐसे हैं जिनको काम ही नहीं मिल रहा। कुछ हम्माल ही तुलावटी बन गए हैं। कई व्यापारी अपने कर्मचारियेां से ये काम करा रहे हैं। इससे यहां काम ढूंढ रहे श्रमिकों की मजदूरी जा रही है। मजदूरों का दमदार यूनियन न होने से उनकी आवाज नहीं उठ रही। सुनील डेहरिया, तुलावटी, कृषि उपज मंडी बड़े व्यापारियों को काम के लिए श्रमिक चाहिए। यदि लाइसेंसी-गैर लाइसेंसी देखेंगे तो काम ही नहीं होगा। 30-40 श्रमिक चाहिए होते हैं। ये व्यापारी अपने श्रमिकों का लाइसेंस बनवाते हैं। इसमे कोई गलत नहीं। कुछ हम्माल सहयोग नहीं करते दिक्कत उन्हीं को है। प्रतीक शुक्ला, अध्यक्ष अनाज व्यापारी संघ हम्माल-तुलावटियों के लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया शुरू हेा रही है। हमने अनाउंसमेंट कराया है। कई नामों की सूची हमारे पास आ गई है। पूरे दस्तावेज मंगाए जा रहे हैं। जल्द ही मंडी परिसर में शिविर लगाकर आनलाइन पंजीयन कराया जाएगा। उसके बाद हम्माल और तुवालटियों के कामों को बांटा जाएगा। देवेंद्र धुर्वे, निरीक्षक, कृषि उपज मंडी, छिंदवाड़ा ईएमएस / 23/01/2026