ज़रा हटके
24-Jan-2026
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वॉशिंगटन (ईएमएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने मिलकर चंद्रमा पर परमाणु फिशन आधारित पावर सिस्टम स्थापित करने की प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ा दिया है। इस योजना का उद्देश्य 2030 तक चांद की सतह पर एक ऐसा रिएक्टर तैनात करना है, जो वहां स्थायी मानव और रोबोटिक मिशनों को लगातार बिजली उपलब्ध करा सके। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब चीन और रूस भी संयुक्त रूप से चंद्रमा पर परमाणु रिएक्टर विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जिससे अंतरिक्ष में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और तीखी हो गई है। यह परियोजना नासा के महत्वाकांक्षी आर्टेमिस अभियान और भविष्य के मंगल मिशनों की आधारशिला मानी जा रही है। नासा और ऊर्जा विभाग के बीच इस सहयोग को एक औपचारिक समझौते के जरिए मजबूत किया गया है, जिसका मकसद अंतरिक्ष विज्ञान में अमेरिका के नेतृत्व को बनाए रखना और चंद्रमा पर लंबे समय तक टिकाऊ मौजूदगी के लिए भरोसेमंद ऊर्जा ढांचा तैयार करना है। अधिकारियों का मानना है कि बिना स्थिर और शक्तिशाली ऊर्जा स्रोत के चंद्रमा पर स्थायी बेस बनाना और वहां निरंतर मिशन चलाना संभव नहीं होगा। इस योजना के तहत फिशन सरफेस पावर सिस्टम विकसित किया जा रहा है, जो चंद्रमा की कठोर परिस्थितियों में भी लगातार बिजली देने में सक्षम होगा। चांद पर लंबे समय तक अंधकार, अत्यधिक ठंड और तापमान में भारी उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां रहती हैं, जहां सौर ऊर्जा हमेशा भरोसेमंद विकल्प नहीं बन पाती। ऐसे में परमाणु फिशन आधारित सिस्टम वर्षों तक बिना रिफ्यूलिंग के काम कर सकता है और 24 घंटे बिजली उपलब्ध करा सकता है। यही कारण है कि इसे भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। नासा प्रशासक जेरेड आइज़ैकमैन ने साफ कहा है कि अमेरिका अब केवल चांद पर लौटने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वहां टिके रहने और आगे मंगल तक पहुंचने की ठोस तैयारी कर रहा है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय अंतरिक्ष नीति के तहत परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल अनिवार्य हो गया है, क्योंकि यही तकनीक गहरे अंतरिक्ष अभियानों को व्यवहारिक और टिकाऊ बना सकती है। नासा और ऊर्जा विभाग के बीच यह सहयोग अंतरिक्ष अन्वेषण के एक नए युग की शुरुआत करेगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने भी इस समझौते को अमेरिका की वैज्ञानिक विरासत से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि जब-जब अमेरिकी विज्ञान और नवाचार ने एकजुट होकर काम किया है, तब-तब देश ने असंभव माने जाने वाले लक्ष्य हासिल किए हैं। मैनहैटन प्रोजेक्ट से लेकर अपोलो मिशन तक इसका इतिहास गवाह है। उनके मुताबिक, मौजूदा ‘अमेरिका फर्स्ट स्पेस पॉलिसी’ के तहत यह पहल उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है। सुदामा/ईएमएस 24 जनवरी 2026