क्षेत्रीय
24-Jan-2026
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- महिलाओं की सुरक्षा पर भाषण, घर में घुसकर धमकी, दोहरा चेहरा उजागर - एनजीटी ने खोली पोल, खुद निकला अवैध खननकर्ता - प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा हौसला - राजा लिल्हारे पर कार्रवाई की मांग, पीड़ित महिला और बसपा नेताओं का आरोप - खैरलांजी में सोशल मीडिया वीडियो विवाद बालाघाट (ईएमएस)। सोशल मीडिया को अदालत समझने वाले और मोबाइल कैमरे को हथियार बनाने वाले भौरगढ़ निवासी राजा लिल्हारे एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। खुद को पर्यावरण रक्षक बताने वाले लिल्हारे पर अब महिला को धमकाने, जनप्रतिनिधियों को बदनाम करने और अवैध उत्खनन से जुड़े गंभीर आरोप लग रहे हैं। बसपा नेता अजाबलाल शास्त्री का कहना है कि राजा लिल्हारे का असली एजेंडा न पर्यावरण है और न समाज सेवा, बल्कि सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर खुद को ‘हीरो’ साबित करना है। आरोप है कि वह किसी के भी निजी जीवन पर अर्नगल टिप्पणी कर वायरल वीडियो डाल देता है और जवाब न मिलने पर खुद को सही मानने लगता है। जिस व्यक्ति को महिला सुरक्षा और पर्यावरण की चिंता बताई जाती है, वही व्यक्ति एक गरीब महिला के घर विवाद करने और धमकी देने पहुंच जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। पीड़िता की शिकायत थाने में धूल फांक रही है और आरोपी खुलेआम वीडियो बनाकर घूम रहा है। रेत माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाने का ढोल पीटने वाले राजा लिल्हारे की एनजीटी में शिकायत उसी पर भारी पड़ गई। संयुक्त जांच समिति ने रिपोर्ट में उसे ‘ब्लैकमेलर’ करार देते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी। जांच में सामने आया कि महाराष्ट्र के लोगों के साथ मिलकर अवैध खनन में उसकी भूमिका संदिग्ध रही। आरोप है कि वैध रेत परिवहन कर रहे ट्रैक्टरों को रोककर अवैध वसूली का प्रयास किया गया, जिसके चलते उसे जेल की हवा भी खानी पड़ी। बावजूद इसके, सोशल मीडिया पर खुद को ‘सिस्टम का दुश्मन’ बताने का नाटक जारी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि सीमित आय वाली दुकान से कोर्ट-कचहरी, वीडियो प्रचार और सोशल मीडिया खर्च कैसे पूरे हो रहे हैं? क्या इसके पीछे कोई और ‘नेटवर्क’ काम कर रहा है? - प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा हौसला स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई न होने से ऐसे तत्वों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। अब मांग उठ रही है कि प्रशासन सिर्फ वीडियो नहीं, हकीकत देखकर कार्रवाई करे।