ज़रा हटके
25-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। किशोरावस्था में नियमित शारीरिक गतिविधि भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम कर सकती है। ताजा वैज्ञानिक अध्ययन में यह दावा किया गया है। यह अध्ययन कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेलमैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ और हर्बर्ट इर्विंग कॉम्प्रिहेंसिव कैंसर सेंटर के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया है। अध्ययन में दावा किया गया है कि किशोर उम्र में फिजिकल एक्टिविटी ब्रेस्ट टिश्यू की संरचना और शरीर में तनाव से जुड़े बायोमार्कर्स को प्रभावित करती है। इसमें 14 से 19 वर्ष की किशोरियों में रीक्रिएशनल फिजिकल एक्टिविटी (आरपीए) और ब्रेस्ट टिश्यू कंपोजिशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और इंफ्लेमेशन से जुड़े बायोमार्कर्स के बीच संबंध का अध्ययन किया गया। शोध में पाया गया कि जो लड़कियां सप्ताह में दो घंटे या उससे अधिक समय तक मनोरंजक शारीरिक गतिविधि करती थीं, उनके ब्रेस्ट टिश्यू में पानी की मात्रा कम थी और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का स्तर भी कम पाया गया। अध्ययन से यह समझने में मदद मिलती है कि किशोरावस्था जो ब्रेस्ट डेवलपमेंट का एक बेहद अहम चरण होता है, में शारीरिक गतिविधि किस तरह उन जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है, जो आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम से जुड़ी होती हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह समय शरीर के लिए बेहद संवेदनशील होता है और इस दौरान अपनाई गई जीवनशैली का लंबे समय तक असर पड़ सकता है। स्टडी की प्रमुख शोधकर्ता रेबेका केहम ने कहा कि यह शोध रीक्रिएशनल फिजिकल एक्टिविटी को ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम से जुड़े जैविक पाथवे से जोड़ता है। उनके मुताबिक, इससे भविष्य में ऐसी नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है, जो ब्रेस्ट कैंसर के खतरे को कम करने पर केंद्रित हों। उन्होंने बताया कि अध्ययन के नतीजों से यह भी सामने आया है कि शारीरिक गतिविधि का असर सिर्फ बॉडी फैट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे ब्रेस्ट टिश्यू की बनावट और शरीर में स्ट्रेस से जुड़े संकेतकों को भी प्रभावित करता है। इस रिसर्च में शामिल किशोरियों की औसत उम्र 16 साल थी। आंकड़ों के मुताबिक, 51 प्रतिशत लड़कियों ने बीते एक सप्ताह में किसी भी तरह की मनोरंजक शारीरिक गतिविधि न करने की बात कही। वहीं, 73 प्रतिशत ने संगठित खेल गतिविधियों और 66 प्रतिशत ने असंगठित गतिविधियों में हिस्सा नहीं लिया। प्रतिभागियों से उनकी हालिया शारीरिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली गई और इसके साथ क्लिनिक विजिट के दौरान खून, यूरिन के सैंपल और ब्रेस्ट टिश्यू का असेसमेंट किया गया। यह अध्ययन वयस्क महिलाओं पर पहले की गई रिसर्च से भी मेल खाता है, जिसमें पाया गया था कि ज्यादा शारीरिक गतिविधि करने वाली महिलाओं में मैमोग्राफिक ब्रेस्ट डेंसिटी कम होती है, जिसे ब्रेस्ट कैंसर के खतरे का एक अहम संकेत माना जाता है। सुसान जी. कोमेन फाउंडेशन के अनुसार, बचपन और किशोरावस्था में सक्रिय रहने वाली महिलाओं में आगे चलकर ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम देखा गया है। सुदामा/ईएमएस 25 जनवरी 2026