ज़रा हटके
27-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। आमतौर पर स्नान को केवल शरीर की बाहरी सफाई से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन आयुर्वेद इस धारणा से कहीं आगे जाकर स्नान को एक महत्वपूर्ण संस्कार और चिकित्सा प्रक्रिया मानता है। आयुर्वेद के अनुसार स्नान सिर्फ शरीर की गंदगी दूर करने का साधन नहीं, बल्कि यह तन और मन दोनों की शुद्धि करता है और व्यक्ति को नई ऊर्जा से भर देता है। आयुर्वेद में बताया गया है कि नियमित स्नान करने से शरीर की सुस्ती दूर होती है, मन प्रसन्न रहता है और नकारात्मक विचारों में कमी आती है। स्नान से रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे थकान कम महसूस होती है और शरीर में स्फूर्ति बनी रहती है। इसका सीधा असर पाचन शक्ति पर भी पड़ता है। रोजाना स्नान करने से मेटाबॉलिज्म में सुधार होता है और शरीर की पाचन अग्नि संतुलित रहती है। शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखना भी बेहद जरूरी है और स्नान इस संतुलन को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। जब पानी शरीर पर पड़ता है, तो रक्त संचार तेज हो जाता है और पाचन तंत्र अधिक सक्रिय होकर काम करने लगता है। मानसिक स्वास्थ्य के लिहाज से भी स्नान बेहद फायदेमंद माना गया है। स्नान करने से तनाव हार्मोन कोर्टिसोल का स्तर कम होता है। शोधों में यह भी सामने आया है कि स्नान के दौरान शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिसे ‘फील गुड हार्मोन’ कहा जाता है। यह हार्मोन मन को शांत और प्रसन्न रखने में मदद करता है। यही कारण है कि स्नान के बाद व्यक्ति खुद को हल्का और तरोताजा महसूस करता है। इसके अलावा स्नान अच्छी नींद के लिए भी सहायक है। जिन लोगों को नींद न आने की समस्या रहती है, उन्हें गुनगुने पानी से स्नान करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे नर्वस सिस्टम शांत होता है। यदि किसी कारणवश स्नान संभव न हो, तो गुनगुने पानी में कुछ देर तक पैर डुबोकर रखने से भी आराम मिलता है। आयुर्वेद में स्नान करने के सही तरीके पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके अनुसार नहाने से पहले शरीर पर तेल से मालिश यानी अभ्यंग करना चाहिए। लगभग 15 मिनट तक तेल से पूरे शरीर की मालिश करने से त्वचा और मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके बाद उबटन का उपयोग करने की सलाह दी जाती है, जो केमिकल युक्त साबुन की तुलना में ज्यादा प्रभावी माना जाता है और त्वचा की मृत कोशिकाओं को हटाने में मदद करता है। स्नान के समय मंत्रोच्चार करना भी लाभकारी बताया गया है, क्योंकि इससे मन और मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सुदामा/ईएमएस 27 जनवरी 2026