ज़रा हटके
27-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। सालों से यह धारणा लोगों के मन में गहराई से बैठी हुई है कि उंगलियां चटकाना एक खराब और नुकसानदायक आदत है, लेकिन जब इस विषय को वैज्ञानिक नजरिए से देखा जाता है, तो तस्वीर कुछ अलग नजर आती है। विज्ञान के अनुसार, जब हम उंगलियां मोड़ते या खींचते हैं, तो जोड़ों के बीच मौजूद साइनोवियल फ्लूइड नामक तरल में हलचल होती है। यही तरल हमारे जोड़ों को चिकनाई देता है, जिससे वे आसानी से और बिना रुकावट हिल-डुल सकें। उंगलियां चटकाने पर इस फ्लूइड के भीतर मौजूद छोटे-छोटे गैस के बुलबुले अचानक टूटते हैं, जिससे ‘चटक’ जैसी आवाज सुनाई देती है। यह आवाज न तो हड्डी टूटने की होती है और न ही जोड़ों के घिसने की, बल्कि यह पूरी तरह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। कई वैज्ञानिक अध्ययनों में भी यह साफ किया गया है कि सामान्य और स्वस्थ व्यक्ति में उंगलियां चटकाने से गठिया या जोड़ों के स्थायी नुकसान का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। यानी अगर कोई व्यक्ति पूरी तरह स्वस्थ है, उसकी हड्डियां मजबूत हैं और जोड़ों में दर्द या सूजन की कोई समस्या नहीं है, तो कभी-कभार उंगलियां चटकाना आमतौर पर नुकसानदायक नहीं माना जाता। आयुर्वेद इस आदत को शरीर के वात, पित्त और कफ दोषों से जोड़कर देखता है। आयुर्वेद के अनुसार, उंगलियां और जोड़ वात दोष से संबंधित होते हैं। जब वात संतुलित रहता है, तो जोड़ों में लचीलापन और मजबूती बनी रहती है। स्वस्थ व्यक्ति में कभी-कभार उंगलियां चटकाने से वात दोष बिगड़ता नहीं है। हालांकि, जिन लोगों में पहले से वात असंतुलित हो, यानी जोड़ों में दर्द, सूजन, अकड़न, गठिया या यूरिक एसिड की समस्या हो, उनके लिए उंगलियां चटकाना परेशानी बढ़ा सकता है और जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। कुछ लोग उंगलियां चटकाने को तनाव से राहत का तरीका भी मानते हैं। घबराहट, बेचैनी या मानसिक तनाव की स्थिति में यह आदत अनजाने में बन जाती है। विज्ञान यह मानता है कि इससे दिमाग को थोड़ी देर के लिए आराम का एहसास हो सकता है, लेकिन यह किसी भी तरह से तनाव का स्थायी समाधान नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उंगलियां चटकाने की आदत बहुत ज्यादा हो जाए या इसके साथ दर्द, सूजन या अकड़न महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे में योग, हल्की एक्सरसाइज, स्ट्रेचिंग, ध्यान और गहरी सांस लेने जैसी तकनीकें अपनाना ज्यादा बेहतर और सुरक्षित विकल्प हो सकते हैं। सुदामा/ईएमएस 27 जनवरी 2026