ज़रा हटके
25-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। जिन इलाकों में फास्ट फूड की दुकानें आसानी से उपलब्ध होती हैं, वहां रहने वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे का खतरा काफी बढ़ जाता है। हाल ही में चेन्नई में किए गए अध्ययन में यह देखा गया कि जिन लोगों के घर के करीब 400 मीटर के दायरे में फास्ट फूड स्टॉल्स होते हैं, वे बार-बार बाहर का खाना खाने लगते हैं। इसका सीधा असर उनके दैनिक आहार पर पड़ता है और घर का पौष्टिक भोजन धीरे-धीरे कम खाया जाता है। फास्ट फूड में बड़ी मात्रा में मैदा, रिफाइंड तेल और नमक होता है। मैदा ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाता है, जिससे शरीर को बार-बार इंसुलिन की जरूरत पड़ती है। लगातार अधिक इंसुलिन की वजह से शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित होता है, जो डायबिटीज की शुरुआत का प्रमुख कारण है। इसके अलावा, ज्यादा तेल और नमक का सेवन दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को भी बढ़ाता है। यह समस्या बच्चों और किशोरों में और गंभीर रूप ले रही है। स्कूल-कॉलेज के आसपास फास्ट फूड स्टॉल्स होने के कारण बच्चे हर दूसरे दिन मोमोज और चाऊमीन खा रहे हैं। इसका नतीजा यह होता है कि उनका वजन तेजी से बढ़ता है, शरीर जल्दी कैलोरी लेने लगता है और ब्लड शुगर असंतुलित रहता है। कम उम्र में ही बच्चों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और डायबिटीज का खतरा पैदा हो रहा है। इसके अलावा, लगातार तैलीय और नमकीन खाने का मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। बच्चों और युवाओं में ऊर्जा का असंतुलन होता है, जिससे वे जल्दी थकते हैं, उनकी एकाग्रता कम होती है और नींद की कमी महसूस होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि फास्ट फूड सिर्फ पेट भरने वाली चीज नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। विशेषज्ञों ने इसे नियंत्रित करने के लिए संतुलित आहार और जीवनशैली अपनाने की सलाह दी है। फास्ट फूड को महीने में केवल एक-दो बार ही शामिल करें और घर का ताजा, पौष्टिक भोजन खाएं। इसमें दाल, सब्जी, चावल, रोटी और फल शामिल हों। इसके साथ ही रोजाना कम से कम तीस मिनट हल्की-फुल्की एक्सरसाइज करें, जिससे कैलोरी बर्न हो और ब्लड शुगर नियंत्रित रहे। पर्याप्त नींद लेना भी जरूरी है, क्योंकि नींद की कमी मोटापा और डायबिटीज के जोखिम को और बढ़ा सकती है। इस तरह जागरूकता और संतुलित आदतों के माध्यम से फास्ट फूड के खतरे से बचा जा सकता है। बता दें कि आधुनिक जीवनशैली में फास्ट फूड लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। भूख लगते ही मोमोज, चाऊमीन, पिज्जा और बर्गर जैसी चीजें आसानी से खरीदी जाती हैं। सुदामा/ईएमएस 25 जनवरी 2026