मॉस्को (ईएमएस)। रूस ने भारत के सामने अपने दो स्वदेशी यात्री विमानों सुपरजेट-100 और सेंकड-114-300 का प्रस्ताव रखा है। ये दोनों विमान पूरी तरह रूसी तकनीक से तैयार हैं और पश्चिमी देशों के पुर्जों पर निर्भर नहीं हैं। रूस का कहना है कि यह पेशकश भारत की तेजी से बढ़ती एविएशन इंडस्ट्री के लिए एक अच्छा ऑप्शन साबित हो सकती है। इतना ही नहीं भारत को आकर्षित करने के लिए रूस ने विमान पर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज के रंगों वाला विशेष डिजाइन तैयार किया है। यह संकेत माना जा रहा है कि रूस सौदे को केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक साझेदारी के तौर पर देख रहा है। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है, तब भारत-रूस रक्षा और तकनीकी सहयोग के बाद पैसेंजर फ्लाइट में भी नया अध्याय शुरु कर सकते है। रिपोर्ट के अनुसार, रूस के उद्योग और व्यापार मंत्रालय ने सुपरजेट-100 के इंटीरियर का वीडियो जारी किया है, जिसमें पीडी-8 जेट इंजन का इस्तेमाल किया गया है। विमान को विंग्स इंडिया 2026 प्रदर्शनी में स्टैटिक डिस्प्ले पर रखा जाएगा। वहीं, यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन पहली बार अपने नए क्षेत्रीय विमान सेंकड-114-300 को इसी आयोजन में पेश करेगी, जहां यह उड़ान प्रदर्शन का हिस्सा भी बनेगा। इसमें टीवी7-117एसटी-01 टर्बोप्रॉप इंजन लगाया गया है, जबकि सुपरजेट-100 में नया पीडी-8 जेट इंजन इस्तेमाल किया गया है। दोनों ही इंजन रूस में विकसित किए गए हैं। रोस्टेक का कहना है कि इन विमानों का डिजाइन और तकनीक उन देशों के लिए खास तौर पर उपयोगी है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों या सप्लाई चेन पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। रूस का मानना है कि भारत का उड़ान कार्यक्रम और मेक इन इंडिया पहल इन विमानों के लिए बड़ा मौका पैदा करती है। उड़ान योजना का लक्ष्य छोटे शहरों और दूरदराज इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है, जहां क्षेत्रीय विमानों की मांग तेजी से बढ़ रही है। फिलहाल भारत की अधिकांश एयरलाइंस बोइंग और एयरबस जैसे पश्चिमी निर्माताओं पर निर्भर हैं। रूस का तर्क है कि उसके विमान भारत को तकनीकी विविधता देने और दीर्घकाल में लागत और आपूर्ति की कमी को कम कर सकते हैं। हालांकि, भारतीय बाजार में इन विमानों की स्वीकार्यता सुरक्षा मानकों, रखरखाव व्यवस्था और आर्थिक स्थिति पर निर्भर करेगी। आशीष/ईएमएस 25 जनवरी 2026