25-Jan-2026
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अबू धाबी(ईएमएस)। रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से जारी विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ी कूटनीतिक सफलता मिलती दिख रही है। संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधि पहली बार एक मेज पर आमने-सामने आए हैं। इस इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस पहल का स्वागत करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करवाने में सफल रहते हैं, तो वह व्यक्तिगत रूप से उनके नाम का प्रस्ताव नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भेजेंगी। फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद यह पहला अवसर है जब तीनों पक्ष त्रिपक्षीय रूप में समाधान खोजने के लिए एकत्रित हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय ने इस शुरुआती वार्ता को बेहद सकारात्मक करार दिया है और संकेत दिए हैं कि बातचीत का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।इस ऐतिहासिक बैठक के बीच वैश्विक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस पहल का स्वागत करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करवाने में सफल रहते हैं, तो वह व्यक्तिगत रूप से उनके नाम का प्रस्ताव नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भेजेंगी। हालांकि, वार्ता के पहले दिन के बाद अब तक कोई आधिकारिक संयुक्त बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन क्रेमलिन ने स्पष्ट किया है कि उनकी टीम सुरक्षा मामलों और रणनीतिक हितों पर बारीकी से ध्यान केंद्रित कर रही है। रूसी दल का नेतृत्व कर रहे राष्ट्रपति के सहयोगी यूरी उशाकोव ने वार्ता के बीच कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि रूस राजनीतिक और राजनयिक माध्यमों से संकट के हल में रुचि रखता है, लेकिन यदि बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तो रूस युद्ध के मैदान में अपने लक्ष्यों को प्राप्त करना जारी रखेगा। वर्तमान में रूस ने यूक्रेन के लगभग 19 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर रखा है। शांति समझौते में सबसे बड़ी बाधा क्षेत्रीय स्वायत्तता और सीमाओं को लेकर बनी हुई है। रूस चाहता है कि यूक्रेन उन हिस्सों से अपनी सेना हटा ले जिन्हें रूस ने अपनी नई सीमाओं में शामिल किया है, जबकि यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की किसी भी प्रकार की क्षेत्रीय रियायत देने के सख्त खिलाफ हैं। शांति के लिए प्रस्तावित रोडमैप में एक प्रमुख बिंदु यूक्रेन का नाटो से न जुड़ना और भविष्य में यूक्रेन की धरती पर किसी भी विदेशी सैनिक की मौजूदगी न होना है। दूसरी ओर, यूक्रेन सुरक्षा की ठोस गारंटी मांग रहा है। राष्ट्रपति जेलेंस्की का कहना है कि अमेरिका के साथ सुरक्षा गारंटी को लेकर दस्तावेज लगभग तैयार हैं और अब केवल अंतिम सहमति का इंतजार है। यूक्रेन ने अपनी रक्षा के लिए अमेरिका से आधुनिक मिसाइलों की मांग भी दोहराई है। डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व में जो 28-सूत्रीय शांति प्रस्ताव रखा था, उसे कई यूरोपीय देशों ने रूस के प्रति नरम बताकर खारिज कर दिया था। रूस ने इसके लिए यूरोपीय संघ को जिम्मेदार ठहराया और उन पर युद्ध को लंबा खींचने का आरोप लगाया। अबू धाबी की यह वार्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था और शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि दोनों ही देश अब युद्ध की भारी मानवीय और आर्थिक कीमत चुकाने के बाद समाधान की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह कूटनीतिक पहल सीमाओं के विवाद को सुलझाकर चार साल पुराने इस रक्तपात को रोक पाएगी। वीरेंद्र/ईएमएस/25जनवरी2026