राज्य
25-Jan-2026


- मप्र के सातों शहरों में 100 प्रतिशत काम नहीं हो पाए भोपाल (ईएमएस)। मप्र में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सात शहर - भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, सतना और उज्जैन को विकसित करना था। लेकिन इन शहरों में परियोजनाओं की गुणवत्ता, समय सीमा में देरी, और धन का सही उपयोग नहीं होने के कारण विकास अधूरा रह गया है। इस कारण स्मार्ट सिटी कागजों में ही सिमट कर रह गई है। जबकि स्मार्ट सिटी मिशन ग्रांट फंड के अंतर्गत 6,930 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं फिर भी शहर स्मार्ट नहीं बन सके। न तो सीवरेज लाइन का काम पूरा हो सका और न ही पेयजल सप्लाई की लाइन डाली जा सकी। शहरों को झुग्गी मुक्त बनाने बहुमंजिला इमारतों के निर्माण का काम भी अधूरा है। स्मार्ट सिटी मिशन के मुख्य घटकों में शहर सुधार (रेट्रोफिटिंग), शहर नवीनीकरण (पुनर्विकास) और शहर विस्तार (ग्रीनफील्ड) के साथ-साथ पैन सिटी पहल शामिल हैं, लेकिन ये काम अधूरे हैं। इनमें से सतना में अब भी काम जारी है। वहीं, अन्य शहरों की बात करें तो यहां प्रोजेक्ट की समय सीमा तो पूरी हो गई लेकिन काम अधूरे हैं। इसकी मुख्य वजह स्मार्ट सिटी फंड का उपयोग अधूरी पड़ी नगर निगम परियोजनाओं में होना है। भोपाल में जमीन के विवादों और धीमी गति के कारण प्रोजेक्ट अटके हैं। इन परियोजनाओं को इसी साल मार्च तक पूर्ण करना होगा। भारत सरकार ने स्मार्ट सिटी मिशन में बजट देना बंद कर दिया है। अधिकतर कर्मचारी भी प्रतिनियुक्ति पर लिए गए हैं। जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा तय की गई समय सीमा पर काम पूरे नहीं हो पाए। इससे लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। वर्ष 2015 में आरंभ हुए स्मार्ट सिटी मिशन में पहले भोपाल, इंदौर और जबलपुर फिर ग्वालियर, उज्जैन, सतना और सागर को शामिल किया गया। सतना में अब भी कई काम अधूरे हैं। अन्य छह शहरों में भी 100 प्रतिशत काम नहीं हो पाए। केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को बंद कर दिया है, बजट मिलना भी बंद हो गया है। प्रतिनियुक्ति पर लिए गए अधिकतर कर्मचारियों मूल विभागों में वापस भेजा जा रहा है। कुछ कर्मचारी आउटसोर्स पर लिए गए थे। स्मार्ट सिटी के अधूरे कामों पर पिछले दिनों नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा था कि नगर निगम के कुछ काम दिखते हैं और कुछ नहीं दिखते। ड्रेनेज लाइन और वाटर सप्लाई डिस्ट्रीब्यूशन लाइन जैसे कुछ काम जमीन के अंदर हुए हैं, जो नजर नहीं आते। लोग हमसे कहते हैं आपने पैसा कहां लगा दिया, सिटी तो स्मार्ट हुई नहीं? मप्र के चारों महानगरों की स्थिति प्रदेश के चार महानगरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर को स्मार्ट सिटी बनान था। भोपाल स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 940 करोड़ रुपये के 70 प्रोजेक्ट पूरे किए गए हैं। करीब 1351 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी शहर स्मार्ट नहीं हो पाया। शहर की स्मार्ट रोड हो या अटल पथ या रानी कमलापति ब्रिज, स्मार्ट पार्क और सबसे बड़ा टीटी नगर, क्षेत्र आज भी उजड़ा हुआ है यहां से करीब 3000 से अधिक पेड़ों की कटाई भी की गई थी। पब्लिक बाइक शेयरिंग का हाल सबसे बुरा है। इंदौर में स्मार्ट पार्किंग सिस्टम, बायो मीथेन प्लांट (चोइथराम मंडी व कबीटखेड़ी), देवगुराडिय़ा सीएंडडी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट, कृष्णपुरा छत्रियों का संरक्षण, रूफटाप सोलर प्लांट और कुछ इलाकों में रिवर फ्रंट व पार्क डेवलपमेंट जैसे कार्य पूरे हो चुके है। वहीं, राजवाड़ा संरक्षण व पुनर्विकास, गोपाल मंदिर क्षेत्र विकास, जिंसी हाट बाजार रीडेवलपमेंट, एरिया बेस्ड डेवलपमेंट में पानी व सीवरेज सुधार, और कमांड कंट्रोल सेंटर के कुछ माड्यूल अभी अधूरे हैं। जबलपुर में बीते आठ वर्षों में 940 करोड़ रुपये खर्च किए। स्मार्ट सिटी के सभी 116 प्रोजेक्ट कागजों पर सी पूरे हो गए हैं परंतु सच्चाई यही है कि अब भी कुछ प्रोजेक्ट अधूरे हैं। हैं। इसमें घमापुर से रोझीक्षक रांझीक्षक बनाई जा रही स्मार्ट रोड पुलिया का निर्माण अभी अटका हुआ है। राइट टाउन, नेपियर टाउन, गोल बाजार क्षेत्र में पांच हजार घरों में 24 घंटे सातों दिन पानी देने की योजना शामिल है, परंतु अब तक सिर्फ 3000 घरों में ही योजना के के तहत कनेक्शन दिए गए है। ग्वालियर में स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा 960 करोड़ से 85 प्रोजेक्ट्रों पर काम किया गया है। वर्तमान में सिर्फ एक प्रोजेक्ट अधूरा है। तकनीकी कारणों के चलते कार पार्किंग के काम में देरी हो रही है। वहीं कार्पोरेशन के कुछ प्रोजेक्ट विफल भी हो चुके हैं, जिनमें शहर में स्मार्ट पार्किंग तैयार करना, पब्लिक बाइक शेयरिंग और वीएमएस बोर्ड जैसी परियोजनाएं है। 11 परियोजनाएं अब भी अधूरी जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 6,930 करोड़ रुपये की 662 परियोजनाएं स्वीकृत की गई थीं। इनमें से 6741.78 करोड़ रुपये की 651 परियोजनाएं ही पूर्ण हो पाईं। 188.22 करोड़ रुपये की 11 परियोजनाएं अब भी अधूरी हैं, इन्हें मार्च 2026 तक पूर्ण करना है। सतना शहर को स्मार्ट सिटी मिशन के तहत 20 अक्टूबर 2017 को पब्लिक लिमिटेड कंपनी स्थापित कर 1530.74 करोड़ का बजट स्वीकृत किया गया। इसमें एबीडी (एरिया बेस्ड डेवलपमेंट) के लिए 1171.41 करोड़ और पैन सिटी के लिए 285.64 करोड़ निधि निर्धारित थी। सतना स्मार्ट सिटी में प्रोजेक्ट्स थे, जिनमें से 29 ही पूर्ण हुए। 52 प्रोजेक्ट्स कार्य आदेश स्तर पर थे। देश की 100 स्मार्ट सिटीज में इसे 79वीं रैंक मिली थी, जो यह दर्शाता है कि फंड का उपयोग, में 81 प्रोजेक्ट पूर्ण करना और प्रदर्शन के मामले में शहर पिछड़ा रहा। 5.50 करोड़ का साइकिल ट्रैक, तीन साल से कम समय में ही उखडऩे लगा है। विनोद / 25 जनवरी 26