राज्य
25-Jan-2026


- अब जल्द शुरू होगा अटल प्रगति पथ का काम भोपाल (ईएमएस)। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर घोषित प्रदेश की एक बड़ी परियोजना 9 सालों से टलती आ रही है। चंबल एक्सप्रेसवे से अटल प्रगति पथ प्रोग्रेस-वे नाम तो मिल गया पर सरकारें बदलने के बाद भी इस एक्सप्रेस वे की प्रोग्रेस नहीं हो सकी जबकि इसकी डेडलाइन 2020 थी। लेकिन पिछले दिनों केंद्रीय सडक़ परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में दिल्ली में हुई मप्र की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में अटल प्रगति पथ का मुद्दा भी उठा। पीडब्ल्यूडी के अफसरों से जानकारी लेने के बाद केंद्रीय मंत्री गडकरी ने अटल प्रगति पथ के अलाइनमेंट को मंजूरी दे दी है। इस कारण अब नौ साल बाद अटल प्रगति पथ के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इससे चंबल अंचल के विकास को रफ्तार मिलेगी। गौरतलब है कि साल 2018 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसकी घोषणा की थी। भिंड के मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मप्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा करते हुए कहा था कि इस एक्सप्रेस वे के बनने से मप्र से राजस्थान और आगे मुंबई तक लोग फर्राटे से पहुंच सकेंगे। ये योजना थी चंबल एक्सप्रेस वे, जिस का बाद में नाम बदल कर अटल प्रगति पथ किया गया। खास बात यह है कि चंबल एक्सप्रेस-वे की घोषणा से लेकर अब तक पांच बार इसका नाम बदला चुका है। अटल प्रगति पथ की लंबाई 299 किलोमीटर होगी। इसके निर्माण पर करीब 12,227 करोड़ रुपए खर्च होंगे। अब अलाइनमेंट को मंजूरी के बाद इसके निर्माण की आस जग गई है। गौरतलब है कि रोड इलाइनमेंट (सडक़ संरेखण) जमीन पर सडक़ या राजमार्ग की केंद्र रेखा (सेंटर लाइन) का लेआउट या स्थिति है। यह क्षैतिज (सीधी या घुमावदार) और ऊध्र्वाकार (ढलान या ऊंचाई) दिशाओं को निर्धारित करता है, जिसका उद्देश्य सबसे किफायती, सुरक्षित और कम बाधाओं वाला रास्ता चुनना है। यह सडक़ के निर्माण, रखरखाव और उपयोग की लागत को तय करता है। लगातार बाधाएं आती रही अटल प्रगति पथ की राह में लगातार बाधाएं आती रही हैं। पहले राष्ट्रीय चंबल घडिय़ाल सेंक्चुरी को नुकसान से बचाने की कवायद और फिर किसानों के जमीन अधिग्रहण विवाद के चलते अटके अटल प्रगति पथ का निर्माण कार्य जल्द शुरू होने के आसार हैं। पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मार्च, 2023 के सर्वे और भूमि अधिग्रहण के रिकॉर्ड के अनुसार अटल प्रगति पथ के लिए मुरैना, श्योपुर और भिंड जिले के 214 गांवों के 26,448 किसानों की 1965.300 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के लिए चिह्नित हुई थी। तत्कालीन सीएम ने यह सर्वे मौखिक निरस्त किया था, सरकार ने ऐसा कोई आदेश कभी जारी नहीं किया, इसलिए वह जमीन अब भी अटल प्रगति पथ के लिए चिह्नित है। केंद्रीय मंत्री गडकरी की ओर से प्रगति पथ के अलाइनमेंट को मंजूरी दिए जाने के बाद इसकी बाधाएं दूर हो गई है। जल्द ही विभाग सडक़ निर्माण की आगे की कार्रवाई शुरू करेगा। अब तक तीन सर्वे निरस्त दरअसल, राज्य सरकार प्रदेश में छह एक्सप्रेस-वे और प्रगति पथ का निर्माण कर रही है। इनमें से सबसे पहले वर्ष 2017 में अटल प्रगति पथ की घोषणा की गई थी। इसके निर्माण का उद्देश्य चंबल के तीनों जिलों- मुरैना, भिंड और श्योपुर को राजस्थान-उप्र के एक्सप्रेस-वे के जरिए देश के कई महानगरों से जोडऩा है। अटल प्रगति पथ की घोषणा के बाद से अब तक तीन बार भूमि अधिग्रहण और अलाइनमेंट के सर्वे हो चुके हैं। प्रगति पथ का अलाइनमेंट पहली बार तब बदला, जब यह चंबल घडिय़ाल सेंक्चुरी की जद में पहुंच गया। इसके बाद दूसरे अलाइनमेंट में इसे चंबल घडिय़ाल सेंक्चुरी की सीमा से डेढ़-दो किलोमीटर दूर किया गया। दूसरा सर्वे इसलिए फेल हो गया, क्योंकि केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बीहड़ में एक्सप्रेस-वे निर्माण की अनुमति नहीं दी। तीसरा अलाइनमेंट सर्वे हुआ, जिसमें किसानों के खेतों की जमीन आ गई। मार्च, 2023 में सर्वे और भूमि अधिग्रहण का काम लगभग पूरा हो गया था, तभी किसानों के विरोध के चलते 27 मार्च, 2023 को तत्कालीन सीएम शिवराज ने अटल प्रगति पथ के तीसरे सर्वे को रद्द करने का मौखिक आदेश वीडियो कॉन्फ्रेंस में दिया था। इस पर सर्वे जहां का तहां रोक दिया गया। अटल प्रगति पथ के निर्माण की उम्मीद तब जगी, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने पहले बजट में 3 जुलाई, 2024 को अटल प्रगति पथ के निर्माण की घोषणा की, लेकिन इसके डेढ़ साल बाद भी अटल प्रगति पथ कागजों से बाहर नहीं निकल पाया। मप्र में छह प्रमुख एक्सप्रेस-वे/प्रगति पथ मप्र में 36,483 करोड़ रुपए से छह प्रमुख एक्सप्रेस-वे/प्रगति पथ बनेंगे। प्रदेश में छह प्रमुख एक्सप्रेस-वे और प्रगति पथ परियोजनाओं में कुल 3,368 किमी लंबाई के विकासपथ निर्माणाधीन/स्वीकृत हैं, जिनकी कुल लागत 36,483 करोड़ रुपए है और अधिकतर परियोजनाओं का लक्ष्य जून 2028 तक पूर्ण करना निर्धारित है। अटल प्रगति पथ की लंबाई 299 किमी, लागत 12,227 करोड, काम जल्द शुरू होगा। नर्मदा प्रगति पथ की लंबाई 867 किमी, लागत 5,299 करोड़, लक्ष्य जून 2028 तक पूरा करना निर्धारित है। विंध्य एक्सप्रेस-वे की लंबाई 676 किमी, लागत 3,809 करोड़, जून 2028 तक पूरा किया जाएगा। मालवा-निमाड़ विकास पथ की लंबाई 450 किमी, लंबाई 7,972 करोड, दिसंबर 2027 तक पूरा होगा। बुंदेलखंड विकास पथ की लंबाई 330 किमी, लागत 3,357 करोड़, जून 2028 तक पूरा होगा। मध्य भारत विकास पथ की लंबाई 746 किमी, लागत 3,819 करोड़, जून 2028 तक पूरा किया जाएगा। विनोद / 25 जनवरी 26