नई दिल्ली (ईएमएस)। पैरों पर दिखने वाली मकड़ी के जाले जैसी बारीक नसें सेहत के लिए खतरे के संकेत हैं, जिन्हें मेडिकल भाषा में स्पाइडर वेन्स कहा जाता है। स्पाइडर वेन्स त्वचा की ऊपरी सतह के नीचे दिखाई देने वाली पतली नसें होती हैं, जो लाल, नीले या बैंगनी रंग की हो सकती हैं। ये ज्यादातर पैरों, टखनों और जांघों पर नजर आती हैं। शुरुआत में इनमें दर्द नहीं होता, इसलिए लोग इन्हें सिर्फ कॉस्मेटिक समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। हालांकि समय के साथ यह समस्या बढ़ सकती है और दर्द, सूजन, भारीपन और चलने-फिरने में परेशानी का कारण बन सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, हमारे पैरों की नसों में छोटे-छोटे वाल्व होते हैं, जो खून को पैरों से दिल की ओर ऊपर ले जाने में मदद करते हैं। जब किसी वजह से ये वाल्व कमजोर हो जाते हैं, तो खून नीचे की ओर जमा होने लगता है। इससे नसों पर दबाव बढ़ता है और वे फैलकर त्वचा पर जाल जैसी दिखने लगती हैं। लंबे समय तक एक ही जगह बैठना या खड़े रहना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और खराब ब्लड सर्कुलेशन इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। इसके अलावा हार्मोनल बदलाव, जैसे प्रेगनेंसी, मेनोपॉज या किशोरावस्था के दौरान भी स्पाइडर वेन्स का खतरा बढ़ सकता है। अगर परिवार में किसी को यह समस्या रही हो, तो जेनेटिक कारणों से भी इसका जोखिम रहता है। मोटापा नसों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे यह परेशानी और बढ़ जाती है। कुछ मामलों में लिवर से जुड़ी समस्याएं या ज्यादा धूप में रहना भी नसों को कमजोर कर सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि विटामिन बी12 की कमी भी स्पाइडर वेन्स की एक अहम वजह हो सकती है। यह विटामिन नसों को मजबूत रखने और ब्लड सर्कुलेशन को सही बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी से नसें कमजोर हो जाती हैं और इसका असर त्वचा पर साफ नजर आने लगता है। अगर इस समस्या को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो यह वैरिकोज वेन्स में बदल सकती है। इस स्थिति में नसें मोटी और उभरी हुई दिखने लगती हैं, दर्द बढ़ जाता है, पैरों में सूजन, जलन, ऐंठन और स्किन का रंग बदलने जैसी दिक्कतें होने लगती हैं। गंभीर मामलों में खून के थक्के बनने का खतरा भी रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोजाना चलना, हल्की एक्सरसाइज करना, लंबे समय तक एक ही पोजिशन में न रहना, वजन को कंट्रोल में रखना और संतुलित आहार लेना इस समस्या से बचाव में मददगार है। बता दें कि आज की तेज रफ्तार जिंदगी में ज्यादातर लोग अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। घंटों तक कुर्सी पर बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित खानपान और बढ़ता वजन धीरे-धीरे शरीर को कमजोर बना देता है। शरीर कई बार हमें शुरुआती संकेत देता है, लेकिन हम उन्हें मामूली समझकर टाल देते हैं। सुदामा/ईएमएस 26 जनवरी 2026