नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश की एकता, गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतीक माना जाने वाला गणतंत्र दिवस इस बार राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गया। कर्तव्य पथ से लेकर राष्ट्रपति भवन तक, राहुल गांधी और विपक्षी नेताओं के सम्मान व प्रोटोकॉल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ऐसी महाभारत छिड़ी कि उत्सव का माहौल सियासी कुरुक्षेत्र में तब्दील होता नजर आया। विवाद की शुरुआत कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य परेड के दौरान हुई। यहां कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को तीसरी पंक्ति में बिठाया गया, जिस पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई। पार्टी ने इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन और विपक्ष के शीर्ष नेताओं का जानबूझकर किया गया अपमान करार दिया। कांग्रेस नेतृत्व ने सवाल उठाया कि क्या नेता प्रतिपक्ष के साथ ऐसा व्यवहार लोकतांत्रिक मर्यादाओं और परंपराओं के अनुरूप है? विपक्ष ने 2014 की पुरानी तस्वीरें साझा कर केंद्र सरकार को घेरा, जिसमें तत्कालीन विपक्षी नेता अग्रिम पंक्तियों में नजर आ रहे थे। कांग्रेस का आरोप है कि यह सरकार की हीन भावना को दर्शाता है। हालांकि, सत्ता पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि बैठने की व्यवस्था राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा जारी टेबल ऑफ प्रेसीडेंस के नियमों के तहत ही की गई थी, जिसमें विभिन्न पदों के लिए वरीयता क्रम निर्धारित होता है। गणतंत्र दिवस की शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित एट होम रिसेप्शन के दौरान विवाद और गहरा गया। इस बार कार्यक्रम की थीम पूर्वोत्तर भारत (नॉर्थ ईस्ट) पर आधारित थी। समारोह में प्रधानमंत्री और विदेशी मेहमानों सहित सभी को पारंपरिक पटका दिया गया था। विवाद तब शुरू हुआ जब राहुल गांधी उस पटके को गले में पहनने के बजाय हाथ में पकड़े नजर आए। बीजेपी ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी को घेरते हुए इसे पूर्वोत्तर की संस्कृति और राष्ट्रपति पद का अपमान बताया। सत्ता पक्ष के नेताओं का दावा है कि राष्ट्रपति द्वारा आग्रह किए जाने के बावजूद उन्होंने पटका नहीं पहना। बीजेपी का आरोप है कि विपक्ष की यह उपेक्षा भारत की सांस्कृतिक विविधता के प्रति उनके नजरिए को दर्शाती है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे फर्जी प्रोपेगेंडा करार दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का पूर्वोत्तर के प्रति प्रेम और जुड़ाव जगजाहिर है। कांग्रेस सांसदों ने दावा किया कि रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी फुटेज देखने पर सच्चाई साफ हो जाएगी कि राहुल गांधी ने पटका पहना था। कुल मिलाकर, इस साल का गणतंत्र दिवस समारोह केवल सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक झांकियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ती कड़वाहट का गवाह भी बना। जहां कांग्रेस इसे आत्मसम्मान और लोकतांत्रिक परंपराओं का हनन बता रही है, वहीं बीजेपी इसे विपक्ष की नकारात्मक राजनीति करार दे रही है। राष्ट्रीय पर्व के इस मौके पर उभरे विवादों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में यह सियासी तल्खी और बढ़ सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस/27जनवरी2026 -----------------------------------