नई दिल्ली,(ईएमएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला की अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) तक की यात्रा भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नए और ऐतिहासिक अध्याय की शुरुआत है। संसद के बजट सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने भारत की बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं और भविष्य की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने अभिभाषण में कहा, शुभांशु शुक्ला का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचना एक ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है। आने वाले वर्षों में भारत अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां देश के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और युवा प्रतिभाओं की मेहनत और संकल्प का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि अब अंतरिक्ष केवल अनुसंधान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अंतरिक्ष पर्यटन भी धीरे-धीरे भारतीयों की पहुंच में आता जा रहा है। राष्ट्रपति के इस बयान को भारत के उभरते अंतरिक्ष उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी के संदर्भ में अहम माना जा रहा है। राष्ट्रपति मुर्मू ने गगनयान मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि देश पूरे उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ इस महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन पर कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि गगनयान मिशन भारत को अंतरिक्ष में मानव भेजने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करेगा। इस दौरान लोकसभा कक्ष में उपस्थित प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित कई सांसदों और नेताओं ने मेजें थपथपाकर राष्ट्रपति के संबोधन का स्वागत किया। गौरतलब है कि शुभांशु शुक्ला ने पिछले वर्ष जून–जुलाई में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 18 दिनों का सफल मिशन पूरा किया था। वे आईएसएस तक पहुंचने वाले पहले भारतीय बने, जिसने देश को वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में नई पहचान दिलाई। इससे पहले वर्ष 1984 में भारतीय वायुसेना के पायलट राकेश शर्मा ने सोवियत संघ के अंतरिक्ष यान से उड़ान भरकर सैल्यूट-7 अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी और अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय बने थे। हिदायत/ईएमएस 28जनवरी26