राज्य
28-Jan-2026
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हाईजैनिक कंडीशन में फिश क्रय एवं विक्रय का बढ़ावा दे - श्री सिंह सभी जिला कलेक्टर नियमित समीक्षा करें संभागायुक्त श्री सिंह ने मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विभाग के बिन्दुओं पर कलेक्टरों से की प्रगति की चर्चा भोपाल(ईएमएस)। संभागायुक्त संजीव सिंह ने मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विभाग के बिन्दुओं पर कलेक्टरों से इसकी प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मत्स्य उत्पादन, रोजगार, आधुनिक तकनीक और मछुआ समुदाय की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। संभाग में भोपाल एवं सभी जिलों के जलाशय एवं तालाब मत्स्य विकास के लिए अत्यंत अनुकूल है। मत्स्य पालन केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक-आर्थिक उत्थान का मजबूत आधार बन चुका है। सभी जिला कलेक्टर इसकी नियमित समीक्षा अपने स्तर से करते रहे। उन्होंने सभी जिला कलेक्टर्स एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देशित किया कि शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मछली व्यावसायी तथा उपभोक्ताओं को हाईजैनिक कंडीशन में मछली क्रय एवं विक्रय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्मार्ट फिश पार्लर स्थापित किए जाए। समीक्षा बैठक में संयुक्त संचालक श्रीमती शशि गोलाइच ने बताया कि भोपाल संभाग के सभी जिलों में कुल जल 1909 तालाब एवं जलाशय में 4 हजार 375 हैक्टेयर क्षेत्र जल अच्छादित है। जिसमें मत्स्य पालन के लिए लगभग 20 हजार 475 क्षेत्र में मत्स्य पालन किया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में मत्स्य बीज उत्पादन लक्ष्य से 2 प्रतिशत अधिक लगभग 2583 मीट्रिक टन में सतत वृद्धि हुई एवं वर्ष 2025-26 में 20 जनवरी 2026 तक 2606 मीट्रिक टन हो गया है। मत्स्य उत्पादन में वर्ष 2024-25 में 53380 एवं 20 जनवरी 2026 तक वर्ष 2025-26 में 48748 की वृद्धि हुई है। संभाग में अभी तक कुल 12942 मछुआ किसान क्रेडिट कार्ड बनाये जा चुके हैं। संभाग के सभी जिलों में आधुनिक तकनीकों जैसे केज कल्चर, बायोफ्लॉक और आरएएस को बढ़ावा देकर उत्पादन क्षमता को बढ़ाया गया। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश नीली क्रांति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मछुआ परिवारों को नाव, जाल, आइस बॉक्स, मोटरसाइकिल और कोल्ड-चेन जैसी सुविधाएं मिलीं, जिससे उनकी आय में सीधा इजाफा हुआ। मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना अंतर्गत ग्रामीण तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन एवं उत्पादन को बढ़ावा देने और स्थानीय मछुआ एवं कृषकों को आत्म निर्भर बनाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इस योजना अंतर्गत शासन के द्वारा इकाई लागत की 2 लाख रूपये निर्धारित की गई है, जिसमें शासन के द्वारा 80 हजार रूपये अनुदान दिया जाता है। मत्स्य पार्लर, मूल्य संवर्धन, विपणन और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं से मछुआरों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है। श्रीमती गोलाइत ने बताया कि केज फिश फार्मिंग, बायोफ्लॉक और आरएएस जैसी आधुनिक प्रणालियों को अपनाकर मछुआ किसान तकनीकी मत्स्य पालन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे कम जल क्षेत्र में अधिक उत्पादन संभव हुआ है। प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़े नवाचारों से मछुआरों को सीधे लाभ मिल रहा है। बैठक में भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह, राजगढ़ कलेक्टर गिरीश कुमार मिश्रा, विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता, सीहोर कलेक्टर बालागुरू के., रायसेन अरूण कुमार विश्वकर्मा एवं सभी जिलों के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। हरि प्रसाद पाल / 28 जनवरी, 2026