26 जनवरी 26 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने बिना नाम दिए बीजेपी पर लगाया बड़ा आरोप! प्रयागराज माघ मेला में लगाया मौनी अमावस्या के स्नान महोत्सव पर विवाद के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का नौवें दिन का व्रत भी जारी हुआ है। गणतंत्र दिवस के अवसर पर शिष्यों ने अपने शिविर के बाहर ध्वजारोहण किया और शिष्यों, भिक्षुओं और मठाधीशों के साथ राष्ट्रगान किया। इस दौरान भारत माता की जय के नारे भी लगाए और उप्र सरकार गौ मांस को बाहर में बेचने तथा हिन्दू विरोधी कार्य को करने का आरोप लगाए जिसमें एक बड़ी घटना बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा दे दिया है, उन्होंने इस्तीफा देने की वजह यूजीसी के नए नियम और अविमुक्तेश्वरानंद मामले को बताया है। इसे हम बारीकी से समझते हैँ दरअसल प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के रथ से संगम पर स्नान करने के विरोध में पुलिस द्वारा कार्यवाही की निचे उतारा गया और अपमानित किया गया स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मौनी अमावस्या के दिन हुए विवाद के बाद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं। लंबे समय तक ठंड में रहने के कारण उन्हें सर्दी लगने और बुखार आने के आशंका जताई जा रही है। दरअसल मौनी अमावस्या के दिन संगम स्नान के लिए जाते समय मेला प्रशासन की ओर से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की पालकी रोके जाने के बाद विवाद शुरू हुआ था। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्यों ने प्रशासन पर धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार के आरोप लगाए थे। इसके बाद से ही वह अपने शिविर के बाहर पालकी पर बैठे हुए हैं और प्रशासन से सार्वजनिक माफी तथा सम्मान स्नान कराए जाने की मांग पर अड़े हुए हैं। इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। वहीं संत समाज की ओर से शांति और संयम बरतने की अपील की गई है। इसे लेकर संतों का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों का समाधान टकराव के बजाय बातचीत और आपसी सम्मान से होना चाहिएशिष्य और पुलिसवाले आमने-सामने आ गए। फिर जमकर धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद शंकराचार्य शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। शंकराचार्य के शिष्य की पिटाई हुई एसओजी ने अविमुक्तेश्वरानंद के पालकी को ढकेलकर बाहर निकाला द्वारका पीठ के शंकराचार्य बोले- यह गौ हत्या जैसा पाप •है और सभी पीठो के शंकराचार्य ने योगी सरकार के कदम का विरोध किया,उधर रामभद्राचार्य बोले- अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्याय किया अब कौन क्या बोल रहा है इस पर शांति से काम लेना चाहिए पहली बात तो ऐ है कि कौन भगवान का सच्चा भक्त है ऐ समझ में नहीं आता है मारना पीटना किसी को भी शोभा नहीं देता सीखो भगवान राम से जिन्होंने अपने राज़धर्म में किसी जनता पर अन्याय नहीं किया राम को लेकर आए है और इसलिए हमें भी लाइए कितनी बार मैं सुन चुका हूँ लेकिन ऐसा नहीं सुना की अहम में अपने को ही भूल गए मैं ही सब कष्टों का कारण है इसे आने ना दो। पहले सभी सनातन जो हिन्दू धर्म के हित धारक होते है उनके बारे में कुछ जाने सबसे बड़ा सनातनी में सर्वोच्च भाव त्याग का होता है वो भी परमार्थ हेतु,*मैं* और *मेरा*, ही सर्वनाश की जड़ है पहले उप्र के 2024 में लोकसभा के चुनाव के नतीजे को देखिए बीजेपी मात्र 34 सीट एनडी ए 37 सीट वो भी 80 सीटों उसमें भी कुछ सीट बहुत कम मार्जिन से जिते हैँ अतः अब ऐ समय बिल्कुल नहीं है जब राज्य का चुनाव बस अगले साल होने जा रहा हो और एक बार बीजेपी का कोर वोटर जो हिन्दू है वो छींटेगा तो बीजेपी को अगला लोकसभा जितना बहुत मुश्किल होगा अब जब आप सत्ता में रहते हैँ तो हर दिन लगता है मेरा ही हुक्म चलेगा लेकिन जिस दिन जनता बदल देगी उस समय लोग आपका मज़ाक उड़ाते हैँ इसलिए ऐसी नौबत आने ही ना दो स्वभाव में राजा को राज्य के हित में किसी साधु संत पर मारना पीटना बिलकुल गलत है अतः अब तो उन्होंने सिर्फ माफी मांगने को कहा है मांग लेने में क्या बुराई है जैसे की उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद ने उनके चरणों में नमन बताया ऐ एक अच्छे राज्य प्रशासन की कार्यवाही है वो क्या बोल रहें हैँ चुनाव में खड़ा होंगे नहीं होंगे ऐ उनका निजी मामला है इस पर योगी सरकार को क़ोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए अब इन सब से शांति से जल्द से जल्द निपटना चाहिए क्योंकि सर पर चुनाव खड़ा है वहाँ स्वर्ण में अधिकांश वोट शंकराचार्य के श्रद्धालु हैं अतः जहाँ साधु संत हैँ वहाँ तर्क में पड़ना ठीक नहीं है क्योंकि बाद में ऐ मामला पूरे भारत में फ़ैल जाएगी और उसका सीधा असर दूसरे राज्यों के चुनाव पर होगा क्योंकि उनके मानने वाले संस्कृत के विद्वान हैं वो गुरू का साथ देंगे लेकिन मार पीट का नहीं क्योंकि इससे आतंक का माहौल बनता है हालांकि अविमुक्तेश्वरानंद का गुस्सा भी देखा हूँ कुछ कटु वचन भी सुना हूँ महाकुम्भ में भागदौड़ से हुई सैकड़ो की मौत पर शंकराचार्य ने उप के प्रशासन पर सवाल किए तो उचित था जब आप आयोजन कराते हैँ तो किसी भी घटना के लिए वहाँ का प्रशासन जिम्मेदार होता है एक तो हमें कई बार यह खुले मंच पर सुनने को मिला जो राम को लाएं हैँ उसे ही हम लाएंगे ऐ कितना ख़राब है क्या राम मंदिर बनने से सचमुच राम आ गए और क्या पहले भगवान राम नहीं थे और क्या आप भगवान राम से भी ऊपर हो गए की हनुमान जी की तरह कंधे पर बैठाकर लें आए उसका असर ऐ हुई की उप्र में 35 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा और दुर्भाग्यवश बीजेपी अपने दम पर सरकार नहीं बना पाई और अब उसके बाद मोदीजी समझ गए और अब वहाँ से हटकर राम को सर्वश्रेष्ठ ईश्वर मानकर देश के विकास की बात करते हैँ दिवाली में अयोध्या में घी के दिए जलने का रिकॉर्ड बनाते हैँ और एक तरफ जनता भूख से मर रही है प्रजा के प्रति दया का होना चाहिए और मजहबी नफरत भी ज्यादा ठीक नहीं होता है इंसान जो भी इंडिया में हो यदि देश प्रेम की भावना हो तो वही भारत के लिए एक एकता की कड़ी है हमें हमेशा बिना मतलब मार पीट से बच कर इंसानियत से काम लेना चाहिए देश में क़ोई भी आतंकी हो उसे कुचलना ही चाहिए लेकिन इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए आज भगवान राम में नहीं अपने अपने रथो, महलों में मस्त हैँ कौन क्या है ऐ तो जनता बताएगी लेकिन यदि सच्चा राम भक्त देखना है तो हिमालय पर्वत पर मिलेंगे अतः इस पर शांति से काम लेना चाहिए तर्क वितर्क से बचना चाहिए लोगों की भलाई पर काम करना चाहिए ज्यादा ज्ञान है तो शांत मन से उसे लोगों तक पहुंचाना चाहिए लेकिन भारत एक स्वतंत्र देश है मारपीट शोभा नहीं देता हैं। धार्मिक विवाद में विवेक से काम लें क्योंकि क्रोध से किसी पर मार पीट करना बिलकुल शोभा नहीं देता भगवान राम ने कभी किसी को नहीं मारा कस्र्णा और दया के सागर हैँ उन्होंने सिर्फ तीर चलाया है वो भी आनंद का भय का नहीं इसलिए रावण भी अन्त समय में भगवान राम से ईश्वर का रूप समझ कर माफी मांग लेता है राम के तीर में जहर नहीं एक प्रकाश था जिसमें दर्द नहीं आनन्द और मोक्ष मिला जिसका जिक्र बाली मोक्ष में भी मिलता है। ईएमएस/ 29 जनवरी 26