व्यापार
29-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। हाल ही में भारत और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच हुई डील के लागू होने पर भारत में यूरोप से आयात होने वाली प्रीमियम कारों पर लगने वाले भारी टैक्स में बड़ी कटौती हो सकती है। इस कटौती का भारतीय ग्राहकों को फायदा मिल सकता है। फिलहाल भारत में पूरी तरह इम्पोर्ट होकर आने वाली कारों पर 70 फीसदी से 110फीसदी तक टैक्स लगता है, जिसकी वजह से बीएमडब्ल्यू, मर्सिडीज-बेंज, फॉक्सवैगन और रेनो जैसी कारें महंगी हो जाती हैं। प्रस्तावित इंडिया–ईयू एफटीए के तहत इन कारों पर टैक्स 40फीसदी तक घट सकता है, और भविष्य में इसे 10 फीसदी तक भी लाया जा सकता है। शुरुआत में यह रियायत सीमित संख्या में कारों पर लागू होगी। डील के लागू होने पर हर साल लगभग 2 लाख पेट्रोल और डीजल कारों पर 40 फीसदी ड्यूटी लागू हो सकती है। हालांकि, इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवीएस) को फिलहाल इस टैक्स कटौती से बाहर रखा जाएगा, ताकि टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी घरेलू कंपनियों के निवेश सुरक्षित रहें। कम टैक्स का सीधा फायदा फॉक्सवैगन, रेनो, स्कोडा, मर्सिडीज-बेंज और बीएमडब्ल्यू जैसी कंपनियों को होगा। इससे ये कंपनियां भारत में ज्यादा मॉडल्स लॉन्च कर सकेंगी और उन्हें किफायती कीमतों पर बेच पाएंगी। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कार बाजार है और इस डील के लागू होने के बाद ग्राहकों को बेहतर टेक्नोलॉजी, ज्यादा विकल्प और प्रीमियम कारों की कम कीमत देखने को मिल सकती है। कुल मिलाकर, इंडिया–ईयू एफटीए भारत के ऑटो सेक्टर के लिए एक गेमचेंजर साबित हो सकता है। फिलहाल यूरोपीय कार कंपनियों की भारत में हिस्सेदारी 4फीसदी से भी कम है, जबकि मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा का दबदबा लगभग दो-तिहाई है।