गुना (ईएमएस)। । जिला कोषालय गुना में करोड़ों रुपये के शासकीय स्टाम्पों की हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें कलेक्टर के कड़े रुख के बाद थाना कैंट में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 (खंजाची) केशव वर्मा के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस पूरे वित्तीय घोटाले का खुलासा तब हुआ जब दिसंबर 2025 में ग्वालियर से आए संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा की टीम ने कोषालय का निरीक्षण किया। जांच के दौरान डिजिटल रिकॉर्ड (IFMIS) और भौतिक रूप से उपलब्ध स्टाम्प स्टॉक के बीच 3 करोड़ 74 लाख रुपये से अधिक का अंतर पाया गया। हालांकि बाद में कुछ चालानों की प्रविष्टियां मिलने के बाद अंतर की राशि 2,70,25,310 रुपये निर्धारित की गई, जिसका हिसाब देने में संबंधित कर्मचारी पूरी तरह विफल रहा। वरिष्ठ कोषालय अधिकारी राकेश कुमार द्वारा थाने में दी गई शिकायत के अनुसार, आरोपी खंजाची केशव वर्मा ने वर्ष 2018 से 2025 की लंबी अवधि के दौरान मध्य प्रदेश कोषालय संहिता 2020 के नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया। जांच में यह तथ्य उजागर हुआ कि आरोपी ने बिना किसी सक्षम अनुमति, बिना कंप्यूटर प्रविष्टि और बिना किसी पावती के ही स्टाम्प वेंडरों को भारी मात्रा में स्टाम्प जारी कर दिए थे। सबसे गंभीर बात यह रही कि आरोपी ने सुरक्षित रखे जाने वाले डबल लॉक सिस्टम की मर्यादा का उल्लंघन किया और बिना अनुमति के स्टाम्पों को निकालकर शासन को करोड़ों रुपये की आर्थिक चपत लगाई। इस मामले में खंजाची केशव वर्मा ने लिखित रूप से यह स्वीकार किया है कि उसने कोषालय अधिकारी के संज्ञान में लाए बिना भूलवश ये स्टाम्प वितरित किए थे, लेकिन पुलिस और प्रशासन इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार मान रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(क) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। वर्तमान में पुलिस 72 पन्नों की जांच रिपोर्ट और ऑडिट दस्तावेजों के आधार पर विवेचना कर रही है, जिसमें आने वाले समय में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। - सीताराम नाटानी