जिपं में संदीप ने रखा ‘जी-राम-जी’, माइनिंग भ्रष्टाचार पर सदस्यों का फूटा गुस्सा बिलासपुर (ईएमएस)। जिला पंचायत की सामान्य सभा इस बार औपचारिक चर्चा तक सीमित नहीं रही। एक तरफ ग्रामीण मजदूरों के लिए नई जी-राम-जी योजना को लेकर उम्मीद की तस्वीर रखी गई, तो दूसरी तरफ अवैध खनन और माइनिंग विभाग की भूमिका को लेकर सदन में तीखी नाराजग़ी खुलकर सामने आई। गारंटी कागज पर नहीं, ज़मीन पर — संदीप अग्रवाल जिला पंचायत की सामान्य सभा में जी-राम-जी योजना पर सबसे स्पष्ट और व्यावहारिक तस्वीर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संदीप अग्रवाल ने रखी। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा कि यह योजना सिर्फ मनरेगा का नाम बदलना नहीं है, बल्कि गांवों में रोजगार, पानी और बुनियादी ढांचे को एक साथ जोडऩे की कोशिश है। संदीप अग्रवाल ने बताया कि जी-राम-जी के तहत अब ग्रामीण मजदूरों को साल में 125 दिन तक वैधानिक रोजगार की गारंटी मिलेगी। यह कोई आश्वासन नहीं, बल्कि कानूनन अधिकार होगा। यदि किसी मजदूर को काम मांगने के बाद भी समय पर रोजगार नहीं मिलता है, तो उसे बेहतर बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मजदूरी भुगतान को लेकर सबसे बड़ी शिकायत रही है देरी की। जी-राम-जी में इसे सीधे सुधारा गया है। मजदूरी का भुगतान 7 दिन के भीतर अनिवार्य होगा और अगर देरी होती है, तो उसका मुआवजा भी मजदूर को मिलेगा। काम किया और पैसा अटका—ऐसा अब नहीं चलेगा, यह बात उन्होंने दो टूक कही। संदीप अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि अब काम ऊपर से तय नहीं होंगे। ग्राम सभा खुद तय करेगी कि गांव को क्या चाहिए—तालाब, सडक़, नाली, सिंचाई, पौधारोपण या आजीविका से जुड़े काम। इसी आधार पर विकसित ग्राम पंचायत प्लान बनेगा, जिसे अलग-अलग विभागों की योजनाओं से जोडक़र लागू किया जाएगा। उनके मुताबिक जी-राम-जी योजना का फोकस चार बुनियादी जरूरतों पर रहेगा—पानी की सुरक्षा, ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका से जुड़े काम, और जलवायु परिवर्तन से निपटने की तैयारी। उन्होंने कहा कि इससे गांव सिर्फ मजदूरी पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि खुद को आर्थिक रूप से मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। संदीप अग्रवाल ने कहा कि यह योजना पंचायतों को सिर्फ काम कराने वाली एजेंसी से आगे बढ़ाकर सर्कुलर इकोनॉमी का हिस्सा बनाएगी, ताकि गांव में ही संसाधन बनें, काम मिले और पैसा गांव में ही घूमे। उन्होंने यह भी बताया कि योजना पूरी तरह डिजिटल मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक उपस्थिति, और सोशल ऑडिट से जुड़ी होगी, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और फर्जीवाड़े की गुंजाइश कम हो। उनके शब्दों में, जी-राम-जी का मकसद सिर्फ रोजगार देना नहीं, बल्कि गांव को आत्मनिर्भर बनाना है। सामान्य सभा, माइनिंग पर तीखा हमला जी-राम-जी योजना पर सकारात्मक चर्चा के बीच सामान्य सभा का माहौल उस वक्त बदल गया, जब खनिज विभाग और अवैध उत्खनन का मुद्दा उठा। जिला पंचायत सदस्यों ने आरोप लगाया कि माइनिंग प्रशासन के दावे ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। सदस्यों ने कहा कि शिकायत के बावजूद अवैध रेत उत्खनन और परिवहन खुलेआम चल रहा है। कई इलाकों में अरपा नदी से बेरोकटोक रेत निकाली जा रही है, पहाड़ काटे जा रहे हैं और गहरे गड्ढे छोड़ दिए जाते हैं, जिनसे हादसों का खतरा बढ़ रहा है। सदस्य स्मृति त्रिलोक श्रीवास ने सदन में कहा कि सूचना देने के बाद भी खनिज अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय माफिया से वसूली कर लौट जाते हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ऐसे प्रमाण और वीडियो हैं, जिनमें सूचना के बाद भी अवैध गतिविधियों को नजरअंदाज किया गया। सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया कि बैठक में खनिज अधिकारी खुद उपस्थित नहीं होते, बल्कि अधीनस्थ कर्मचारियों को भेज दिया जाता है, जिनके पास सवालों का कोई जवाब नहीं होता। सदन में यह मांग भी उठी कि खनिज अधिकारी को सीधे सामान्य सभा में बुलाकर जवाबदेह बनाया जाए। लगातार बढ़ती नाराजग़ी के बीच जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी को कहना पड़ा कि माइनिंग से जुड़ी शिकायतों को कलेक्टर के समक्ष रखा जाएगा। सदस्यों ने स्पष्ट कर दिया कि अगर अवैध उत्खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला सिर्फ शिकायत तक सीमित नहीं रहेगा। मनोज राज/योगेश विश्वकर्मा 29 जनवरी 2026