देखरेख के अभाव में पूरे अस्पताल से नोजल हो गए चोरी, मेडिकल प्रबंधन नहीं दे रहा ध्यान छिंदवाड़ा (ईएमएस)। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्थाओं की पोल फिर एक बार खुल गई है। जानकारी के मुताबिक अस्पताल का फायर सेफ्टी सिस्टम पिछले कई महीनों से बंद पड़ा है, जिसके चलते किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि फायर सिस्टम की नियमित देखरेख न होने के कारण फायर हाइड्रेंट नोजल तक चोरी हो गए हैं। नोजल गायब होने से आपात स्थिति में दमकल कर्मियों के लिए पानी का उपयोग करना भी मुश्किल हो जाएगा। अस्पताल में रोज़ाना हजारों मरीज और उनके परिजन आते हैं, ऐसे में आग लगने की आपात स्थिति में तैयारी न होना गंभीर चिंता का विषय है। अस्पताल स्टाफ का कहना है कि फायर सेफ्टी सिस्टम के खराब होने की शिकायतें कई बार प्रबंधन को मौखिक और लिखित भेजे गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि न तो सिस्टम की मरम्मत कराई गई और न ही चोरी हुए नोज़ल की जगह नए लगाए गए। इस लापरवाही ने अस्पताल की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं और किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल अस्पताल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था पर इसका सीधा सवाल उठता है। नोज़ल का चोरी होना दर्शाता है कि न केवल उपकरणों की सुरक्षा कमजोर है, बल्कि नियमित निरीक्षण भी नहीं किया जाता। यदि समय-समय पर निरीक्षण और इन उपकरणों की देखभाल होती रहती तो नोजल चोरी होने की नौबत नहीं आती। आग लगी तो संभालना होगा मुश्किल शहर के सरकारी अस्पताल में सुरक्षा इंतज़ामों की खुली पोल सामने आई है। फायर सेफ्टी सिस्टम महीनों से बंद पड़ा है और हाइड्रेंट नोज़ल चोरी हो चुके हैं, जिससे आग लगने की स्थिति में हालात बेकाबू हो सकते हैं। कर्मचारियों ने बताया कि कई बार शिकायत के बावजूद प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया। फायर हाइड्रेंट नोज़ल वह उपकरण है, जिसके माध्यम से दमकलकर्मी पानी को नियंत्रित कर आग बुझाते हैं। नोज़ल गायब होने का मतलब है कि आपात स्थिति में फायर हाइड्रेंट बिलकुल बेकार हो जाएंगे। जिला अस्पताल में रोज़ाना हजारों मरीजों की मौजूदगी के बीच यह लापरवाही बड़ा ख़तरा बनती जा रही है। यदि ऐसे में आग लगी तो हालात संभालना मुश्किल होगा। खतरे में मरीजों-परिजनों की सुरक्षा, अलार्म भी बंद अस्पताल में रोज़ाना हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। इसके अलावा उनके परिजन, डॉक्टर, नर्सें और अन्य कर्मचारी लगातार अस्पताल परिसर में मौजूद रहते हैं। ऐसे में आग से सुरक्षा के साधन खराब होने और उपकरणों के गायब होने से मरीजों की जान सीधे जोखिम में पड़ सकती है। आपातकालीन स्थिति निर्मित होने पर और इसकी जानकारी देने के लिए लगाए गए अलार्म तक बंद पड़े हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अस्पताल में फायर सिस्टम हमेशा एक्टिव होना चाहिए, क्योंकि बिजली, ऑक्सीजन सिलिंडर, केमिकल और अन्य संवेदनशील सामग्री के चलते आग लगने की संभावना अधिक रहती है। आपातकालीन सीढियों में भी लगा जंक आपातकालीन स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बड़े-बड़े संस्थानों खास तौर पर अस्पतालों में फायर सिस्टम लगाए गए है और इसके लिए अलग से आपातकालीन द्वार भी बनाए गए है ताकि मरीजों को और परिजनों को ऐसे हालातों में सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। लेकिन जिला अस्पताल के ई ब्लॉक में बने आपातकालीन द्वार से बाहर निकालने के लिए बनाई गई लोहे की सीढि?ों में देख-रेख के अभाव में जंक लग चुका है। ईएमएस/मोहने/ 29 जनवरी 2026