- सिडनी क्रिकेट ग्राउंड का ‘एक्स्ट्रा टेस्ट’ नई दिल्ली (ईएमएस)। क्रिकेट के लंबे और रोचक इतिहास में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं, जिनकी मिसाल आज भी दी जाती है। कुछ रिकॉर्ड दोहराए जाते हैं, तो कुछ कभी दोबारा संभव ही नहीं हो पाते। ऐसी ही एक ऐतिहासिक घटना 17 फरवरी 1883 को ऑस्ट्रेलिया के सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर घटी, जिसने टेस्ट क्रिकेट की किताब में एक ऐसा अध्याय जोड़ा, जो आज भी अनोखा है। यह वही मैच है जिसे ‘एक्स्ट्रा टेस्ट’ कहा जाता है और जिसने खेल के नियमों को हमेशा के लिए बदल दिया। यह मुकाबला उस दौर में खेला गया था, जब एशेज की शुरुआत हो चुकी थी। इंग्लैंड को अपने घर में ऑस्ट्रेलिया से हार मिली थी और ब्रिटिश मीडिया ने इसे क्रिकेट का अंत करार दिया था। अखबारों में तक लिखा गया कि ऑस्ट्रेलियाई टीम ट्रॉफी के साथ इंग्लैंड क्रिकेट की राख ले गई है। इस हार का बदला लेने इंग्लैंड टीम इवो ब्लाइ की कप्तानी में ऑस्ट्रेलिया पहुंची और यहीं से एशेज की ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्विता की नींव मजबूत हुई। इंग्लैंड का ऑस्ट्रेलिया दौरा और निर्णायक मुकाबला इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीन मैचों की टेस्ट सीरीज रखी गई। पहला टेस्ट मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया ने जीता, वहीं दूसरा मुकाबला इंग्लैंड ने अपने नाम कर सीरीज बराबर कर दी। तीसरा टेस्ट ड्रॉ रहा और माना गया कि इंग्लैंड एशेज अपने नाम कर चुका है। लेकिन दोनों टीमों ने रोमांच बढ़ाते हुए एक अतिरिक्त टेस्ट खेलने पर सहमति बनाई, जिसे सीरीज का चौथा और टेस्ट इतिहास का 13वां मुकाबला माना गया। यह मैच 17 से 21 फरवरी 1883 तक खेला गया और ऑस्ट्रेलिया ने इसे चार विकेट से जीत लिया। हर दिन नई पिच पर मैच—क्रिकेट इतिहास की अनोखी घटना इस मैच को खास बनाने वाली बात वह करार था जो मुकाबले से पहले हुआ। दोनों टीमों ने निर्णय लिया कि यह टेस्ट हर दिन एक नई पिच पर खेला जाएगा। हालांकि यह मैच चार दिन में समाप्त हो गया, क्योंकि दूसरा दिन विश्राम दिवस था। क्रिकेट इतिहास में इससे पहले और इसके बाद कभी भी कोई टेस्ट मैच इस तरह नहीं खेला गया। टेस्ट के नियमों के अनुसार पाँच दिनों का पूरा खेल एक ही पिच पर होता है, लेकिन इस ‘एक्स्ट्रा टेस्ट’ में हर दिन नई पिच का प्रयोग किया गया, जो इसे अनोखा और अविस्मरणीय बनाता है। मैच का रोमांचकारी घटनाक्रम इंग्लैंड ने पहली पारी में एलन स्टील के शानदार 135 रनों की बदौलत 263 का स्कोर बनाया। ऑस्ट्रेलिया जवाब में एक रन से पीछे रह गया और 262 पर आउट हो गया। दूसरी पारी में इंग्लैंड 197 पर ढेर हुआ और ऑस्ट्रेलिया को 199 रनों का लक्ष्य मिला। जॉर्ज बोनर (87 रन) और जैक ब्लैकहैम (57 रन) के पहले पारी के महत्वपूर्ण योगदान के बाद, ऑस्ट्रेलिया ने लक्ष्य छह विकेट खोकर हासिल कर लिया। यह मैच सिर्फ स्कोर या नतीजे के कारण नहीं, बल्कि उसके खेले जाने के तरीके के कारण इतिहास में अमर है। ‘एक्स्ट्रा टेस्ट’ आज भी क्रिकेट के नियमों और परंपराओं में अद्वितीय उदाहरण के रूप में याद किया जाता है। डेविड/ईएमएस 01 फरवरी 2026