अंतर्राष्ट्रीय
01-Feb-2026
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लंदन (ईएमएस)। चिली में स्थित जेमिनी साउथ टेलीस्कोप ने धातु और गैस के विशाल बादल की खोज की है। इस अजीब और दुर्लभ घटना ने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया। पृथ्वी से लगभग 3,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित सूर्य जैसे तारे जे0705+0612 की रोशनी सितंबर 2024 से मई 2025 तक अचानक घटकर सामान्य से करीब 40 गुना कम हो गई। जांच में पता चला कि तारे के सामने से एक विशाल बादल गुजर रहा था। यह बादल गैस और धूल से बना था और अपनी संरचना में वाष्पीकृत धातुओं की तेज हवाओं को समेटे हुए था। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि यह बादल तारे से करीब दो अरब किलोमीटर दूर था और इसका व्यास लगभग 200 मिलियन किलोमीटर था। इतने विशाल आकार का होने के बावजूद बादल अपने स्थिर कक्षा में घूम रहा था और तारे की रोशनी को लगभग नौ महीने तक ब्लॉक किए रखा। इस रहस्यमयी बादल की रासायनिक संरचना का विश्लेषण जेमिनी टेलीस्कोप के ‘घोस्ट’ उपकरण की मदद से किया गया। स्पेक्ट्रोस्कोपी के दौरान इसमें लोहे और कैल्शियम जैसी भारी धातुओं की उपस्थिति सामने आई। वैज्ञानिकों ने पाया कि ये धातुएं गैसीय अवस्था में तेज गति से बह रही थीं। यह पहला मौका था जब किसी ग्रह या कम द्रव्यमान वाले तारे के चारों ओर घूमने वाली डिस्क में गैस की गति को इतनी स्पष्टता से मापा गया। इस डेटा ने साबित किया कि यह केवल धूल का ढेर नहीं बल्कि गतिशील और सक्रिय वातावरण है। वैज्ञानिकों के सामने यह सवाल भी था कि इस विशाल बादल को स्थिर रखने वाला केंद्र क्या है। प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार यह केंद्र बृहस्पति ग्रह से कई गुना भारी कोई वस्तु हो सकती है। यह या तो एक विशाल ग्रह होगा या ‘भूरा बौना’ तारा। अगर यह कोई ग्रह है, तो इसे सर्कमप्लेनेटरी डिस्क कहा जाएगा, और अगर यह तारा है, तो इसे सर्कमसेकेंडरी डिस्क के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह डिस्क एक भयानक टक्कर का परिणाम है। सिस्टम के बाहरी हिस्सों में दो बड़े ग्रहों के बीच हुई टक्कर के कारण भारी मात्रा में चट्टानें और धूल अंतरिक्ष में फैल गई। टक्कर की गर्मी के कारण चट्टानों में मौजूद धातुएं वाष्पित होकर गैस में बदल गईं और यह अब एक विशाल बादल के रूप में रहस्यमयी वस्तु के चारों ओर घूम रहा है। यह खोज इस बात का प्रमाण है कि ब्रह्मांड में परिवर्तन स्थायी है। भले ही यह तारा लगभग दो अरब साल पुराना है, फिर भी इसमें बड़े पैमाने पर विनाश और सृजन की प्रक्रियाएं जारी हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह घटना ग्रह प्रणालियों के विकास और ब्रह्मांडीय धूल की संरचना को समझने का अनोखा अवसर है। सुदामा/ईएमएस 01 फरवरी 2026