मारवाड़ी पंजाबी जैन बंगाली कारोबारियों का पलायन? कुकी और मैतई आतंकी गुटों का वसूली अभियान मणिपुर (ईएमएस)। मणिपुर में 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन का 1 साल पूरा हो जाएगा। राष्ट्रपति शासन में मणिपुर की कानून व्यवस्था की स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। मणिपुर में 3 साल से अशांति फैली हुई है। इंफाल वेली से म्यांमार बॉर्डर तक कहीं के भी हालत सामान्य नहीं है। अभी भी लोग शरणार्थी शिविरों में रहने के लिए विवश हैं। कुकी और मैतई समुदाय के लोग एक दूसरे के इलाके में नहीं जा पा रहे हैं। सरकारी कर्मचारी और अस्पतालों की सेवा भी लगभग ढप्प पड़ी हुई है। मणिपुर में 16 जिले हैं। जिनमें से 8 जिलों में आज भी अशांति बनी हुई है आए दिन हमले होते हैं। 8 जिलों में हथियारबंद गिरोह जवरिया वसूली कर रहे हैं। पेट्रोल पंपों से रंगदारी मांगी जा रही है। केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती होने के बाद भी मणिपुर में हालात सामान्य नहीं हो पा रहे हैं। आए दिन पेट्रोल पंपों को बंद करा दिया जाता है। पेट्रोल डीजल ब्लैक में बिक रहा है। बोतल में बिक रहे पेट्रोल को नया नाम दे दिया गया है। बोतल ऑयल कॉरपोरेशन अर्थात बीओसी के नाम से पेट्रोल डीजल की बिक्री हो रही है। 2000 का गैस सिलेंडर मणिपुर में कुछ भी सामान्य नहीं है। यहां पर गैस सिलेंडर ₹2000 मे ब्लैक में बिक रहा है। हर वक्त डर का माहौल बना रहता है। कुकी और मेतई समुदाय के युवा आपस में भिड़ते रहते हैं। यहां का युवा वर्ग अब मणिपुर छोड़कर अन्य राज्यों में पलायन कर रहा है। मणिपुर के युवा असम कोलकाता दिल्ली मुंबई में जाकर काम करने के लिए विवश हो रहे हैं। कारोबारी छोड़ रहे हैं, मणिपुर मणिपुर के विभिन्न बाजारों में मारवाड़ी, पंजाबी, जैन, बिहारी और बंगाली समुदाय के लोग यहां पर व्यापार कर रहे थे। रंगदारी और असुरक्षा के कारण उन्हें बहुत घाटा हुआ है। बार-बार बाजार बंद हो जाता है। माल की आवाजाही में कठिनाई हो रही है। यहां के व्यापारी कर्ज में डूब चुके हैं। कर्ज और असुरक्षा के कारण वह भी मणिपुर से पलायन कर रहे हैं। जिसके कारण यहां के लोगों की समस्या और भी बढ़ती चली जा रही है। मणिपुर में उग्रवादी संगठनों का एक तरह से कब्जा हो गया है। मेतई और कुकी उग्रवादी संगठन अपने-अपने क्षेत्र में लगातार वसूली कर रहे हैं। उग्रवादी कारोबारियों से 10,000 से लेकर ₹100000 तक की वसूली के लिए दबाव बनाते हैं। आसानी से यहां पेट्रोल डीजल और रसोई गैस तक नहीं मिलती है। जिसके कारण यहां के लोगों को जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। राष्ट्रपति शासन को लगे हुए एक साल होने को आ रहा है। उसके बाद भी स्थितियों में कोई सुधार नहीं है। ऐसा लगता है, केंद्र सरकार ने मणिपुर को भगवान भरोसे छोड़ दिया है। एसजे/ईएमएस/01/02/2026