राज्य
01-Feb-2026


भोपाल (ईएमएस)। मोदी सरकार की ओर से संसद में पेश 12वें आम बजट को संक्षेप में आम गरीबों, मेहनतकश वर्गों, मजदूरों और किसानों के हितों को दरकिनार कर कारपोरेट घरानों और मुट्ठी भर अमीरों की तिजोरियों को भरने वाला बजट कहा जा सकता है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर किसानों को फसल की लागत का डेढ़ गुना दाम देने और इसकी खरीदी निर्धारित एमएसपी पर सुनिश्चित करने की बात को भूल कर अब इस सरकार ने कृषि और मंडी व्यवस्था ही कारपोरेट कंपनियों को सौंपने के इरादे जाहिर कर दिए हैं। जब खेती संकट में है, किसान आत्महत्या कर रहे हैं, तब मोदी सरकार ने किसानों को राहत देने की बजाय कृषि और कृषि से जुड़ी गतिविधियों के लिए बजट में कमी की है। खाद पर मिलने वाली सब्सिडी को खत्म करने का इरादा भी जाहिर कर दिया है। मनरेगा तो यह सरकार पहले ही खत्म कर चुकी है। उक्त आशय की बात मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने एक विज्ञप्ति में कही वे बजट पर प्रतिक्रिया दे रहे थेI जसविंदर सिंह ने कहा कि इस बजट में रोजगार के नए अवसर तलाशने की तो बात भी नहीं की गयी है। समाज कल्याण की सारी योजनाओं में पिछले साल की तुलना में कटौती की गई है। सामाजिक रूप से वंचित तबके भी इस बजट से सरकार की मनुवादी सोच का शिकार हुए हैं। उन्होने कहा कि सबसे बड़ी बात यह है कि यह बजट देश की संप्रभुता और आर्थिक स्वतंत्रता को भी दांव पर लगाने वाला बजट है। जब अमरीका हमारे देश पर टैरिफ थोप रहा है, तब भी इस सरकार ने उसका मुकाबला करने की बजाय वार्ताएं करने और अमेरिका के सामने समर्पण करने की तरकीब निकाली है। यह बजट महिला विरोधी भी है । देश का हर तबका इससे निराश हुआ है। इस बजट से मोदी सरकार ने फिर साबित कर दिया है कि वह सिर्फ कारपोरेट घरानों की ही सरकार है। हरि प्रसाद पाल / 01 फरवरी, 2026