नई दिल्ली (ईएमएस)। चेहरे को चमकाने के लिए आजकल लोग कई तरह के उपाय करते है, लेकिन असली सुंदरता शरीर के अंदर से आती है, खासकर हमारे लिवर यानी यकृत से। लिवर और प्लीहा में स्थित रंजक पित्त चेहरे की रंगत, ताजगी और चमक को नियंत्रित करता है। जब यह सही से काम करता है, तो खून शुद्ध रहता है और इसका असर सीधे त्वचा पर दिखाई देता है। आयुर्वेद में पित्त के पांच प्रकार बताए गए हैं, जिनमें रंजक पित्त का काम बेहद खास माना गया है। यह भोजन से बने रस को रक्त में बदलने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। जब रंजक पित्त संतुलित होता है, तो शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर ठीक रहता है, थकान कम होती है और त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है। वहीं, जब यह असंतुलित हो जाता है, तो चेहरे पर पीलापन, काले घेरे, पिगमेंटेशन, मुंहासे और बेजानपन दिखाई देने लगते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, रंजक पित्त को मजबूत और संतुलित करने के लिए आहार का विशेष महत्व है। आंवला, अनार, चुकंदर, मुनक्का और नारियल पानी जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ खून को शुद्ध करते हैं और लिवर को मजबूती देते हैं। गिलोय, भृंगराज और भूमि आंवला जैसी जड़ी-बूटियां लिवर टॉनिक का काम करती हैं। इसके अलावा, गुस्सा और तनाव को नियंत्रित रखना भी जरूरी है, क्योंकि अधिक क्रोध सीधे लिवर को प्रभावित करता है और रंजक पित्त को असंतुलित कर देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि लिवर और रंजक पित्त का संतुलन बनाए रखना न केवल स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह चेहरे की प्राकृतिक चमक और ताजगी का सबसे बड़ा स्रोत भी है। आजकल की जीवनशैली रंजक पित्त के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। देर रात तक जागना, जंक फूड, अधिक तला-भुना और मसालेदार खाना, शराब, सिगरेट और लगातार तनाव लिवर को कमजोर करते हैं। कमजोर लिवर का असर सीधे रंजक पित्त पर पड़ता है और खून अशुद्ध होकर शरीर पर, विशेषकर चेहरे पर दिखाई देने लगता है। ऐसे में केवल क्रीम या बाहरी उपचार से समस्या का समाधान नहीं होता। सुदामा/ईएमएस 02 फरवरी 2026