तेहरान (ईएमएस)। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के कार्यालय ने हाल ही में हुई अशांति के दौरान मारे गए लोगों की सूची जारी की है। सूची में 2,986 लोगों के नाम शामिल हैं, जिसमें आम नागरिकों के साथ-साथ सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, अब तक कुल 3,117 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 131 की पहचान अभी नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, उनकी पहचान होने के बाद एक अतिरिक्त सूची जारी की जाएगी। बयान में कहा गया है कि सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्ध है और मरने वाले सभी लोग ईरान के अपने नागरिक हैं। किसी भी पीड़ित परिवार की बात अनसुनी नहीं की जाएगी। विरोध प्रदर्शन दिसंबर के अंत से जनवरी तक जारी रहे और यह देश की मुद्रा रियाल के तेजी से कमजोर होने के विरोध में शुरू हुए थे। शुरुआत में ये शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में हिंसक झड़पों में बदल गए। इस दौरान जानमाल का नुकसान हुआ और मस्जिदों, सरकारी इमारतों और बैंकों को भी नुकसान पहुंचा। ईरान ने इन घटनाओं के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया। इस बीच, ईरानी सेना प्रमुख अमीर हातामी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका कोई गलती करता है, तब इससे उसकी सुरक्षा, इजरायल की सुरक्षा और पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। हातामी ने कहा कि ईरान के सशस्त्र बल पूरी तरह तैयार हैं और क्षेत्र में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने पड़ोसी देशों की उन घोषणाओं का स्वागत किया कि वे ईरान के खिलाफ अपने क्षेत्र या हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं होने देंगे। हातामी ने कहा कि अगर कोई समस्या का समाधान चाहता है, तो उसे ईरानी जनता के साथ सम्मान से पेश आना चाहिए। यह बयान तब आया है जब तेहरान और वाशिंगटन के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक बड़ा सैन्य बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है और ईरान के पास अमेरिका के साथ समझौता करने के लिए सीमित समय है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौता नहीं करता, तो यह देखा जाएगा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की चेतावनी सही साबित होती है या नहीं। खामेनेई ने कहा था कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तब इससे पूरे क्षेत्र में युद्ध भड़क सकता है। बता दें कि दिसंबर के अंत से जनवरी तक ईरान में कई हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन हुए। ये प्रदर्शन देश की मुद्रा रियाल के तेजी से कमजोर होने के विरोध में शुरू हुए थे। शुरुआत में ये प्रदर्शन शांतिपूर्ण थे, लेकिन बाद में झड़पों में बदल गए। इस दौरान जानमाल का नुकसान हुआ और मस्जिदों, सरकारी इमारतों और बैंकों को भी नुकसान पहुंचा। ईरान ने इन घटनाओं के लिए अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है। इस बीच, ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातामी ने पिछले सप्ताह चेतावनी दी कि अगर अमेरिका कोई भी गलती करता है, तब इससे उसकी अपनी सुरक्षा, इजरायल की सुरक्षा और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। आशीष दुबे / 02 फरवरी 2026