अंतर्राष्ट्रीय
02-Feb-2026


क्वेटा (ईएमएस)। बलूचिस्तान के 12 शहरों में हुए भीषण हमलों के बाद पाकिस्तान फिर अपनी आंतरिक नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए भारत और अफगानिस्तान पर आरोप लगाने में जुट गया है। हालांकि भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, वहीं अफगानिस्तान में तालिबान शासित सरकार ने पाकिस्तान के दावों को झूठा और मनगढ़ंत बताया है। तालिबान नियंत्रित सरकारी चैनल ने बयान को पाकिस्तान की रणनीति को वर्षों पुराना प्रोपेगेंडा करार दिया है। मीडिया के अनुसार, जब भी पाकिस्तान के भीतर अस्थिरता बढ़ती है, उसकी सेना और सरकार बाहरी दुश्मनों का हवाला देकर अपनी विफलताओं को छिपाने में लग जाती है। इस रणनीति में अफगानिस्तान को बार-बार बलि का बकरा बनाया गया है। रिपोर्ट में लिखा कि यह कोई शासन नीति नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने के लिए चलाया जा रहा लंबा प्रचार अभियान है। तालिबानी मीडिया ने बलूच अलगाववादी नेता बशीर जेब का विशेष रूप से उल्लेख कर पाकिस्तान के दावों की पोल खोली है। पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि बशीर जेब उत्तरी अफगानिस्तान में तालिबान के संरक्षण में रहता है। लेकिन हालिया बलूचिस्तान हमलों के दौरान बशीर जेब को खुद एक बाइक पर हमलावरों का नेतृत्व करते देखा गया। इससे यह स्पष्ट हो गया कि वह बलूचिस्तान से ही अपने ऑपरेशन चला रहा था और ‘ऑपरेशन हेरोफ 2.0’ का नेतृत्व कर रहा था। तालिबानी मीडिया ने कहा कि इन तस्वीरों और घटनाओं ने पाकिस्तान के वर्षों पुराने दावों को झूठा साबित कर दिया है। यहां तक कि पाकिस्तान की अपनी मीडिया को भी अंततः यह स्वीकार करना पड़ा कि बशीर जेब बलूचिस्तान में ही सक्रिय है। इससे सरकार और मीडिया दोनों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। तालिबान ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान इसी तरह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के नेताओं को लेकर भी निराधार आरोप लगाता रहा है। इसका उद्देश्य असली समस्याओं का समाधान करना नहीं, बल्कि बाहरी खतरे का डर दिखाकर सत्तावादी नियंत्रण को正 ठहराना है। तालिबानी मीडिया के अनुसार, इस नीति के नकारात्मक परिणाम अब पाकिस्तान की राजनीति में साफ दिख रहे हैं। कबायली इलाकों में सरकार का प्रभाव घट रहा है, असंतोष बढ़ रहा है और धार्मिक वर्गों में भी उसकी पकड़ कमजोर हो रही है। अंततः, दूसरों पर दोष मढ़ने से न आंतरिक जख्म भरते हैं और न ही हाशिए पर पड़े समुदायों का गुस्सा शांत किया जा सकता है। आशीष दुबे / 02 फरवरी 2026