देहरादून (ईएमएस)। दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान के कर्मचारियों को दर्शकों से प्रदान की जा रही पेंशन बंद किए जाने के विरोध मंे संस्थान में तालाबंदी करते हुए प्रवेश द्वार पर प्रदर्शन कर धरना दिया। उन्होंने कहा कि जब तक पेंशन बहाली के लिखित आदेश नहीं मिल जाते तब तक आंदोलन को जारी रखा जाएगा। यहां राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान कर्मचारी संघ एवं सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले बड़ी संख्या में अधिकारी एवं कर्मचारी संस्थान के प्रवेश द्वार पर इकटठा हुए और वहां पर पेंशन बहाली, स्थाई निदेशक की तैनाती एवं मेडिकल की सुविधाएं प्रदान किए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर धरना दिया। इससे पूर्व संस्थान में पूर्ण रूप से तालाबंदी कर दी गई। इस अवसर पर संघ के अध्यक्ष जगदीश चंद्र कुकरेती ने कहा कि एनआईईपीवीडी के कर्मचारियों को पिछले कई दशकों से प्रदान की जा रही पेंशन गत माह एक जनवरी से बंद कर उनके हितों पर कुठाराघात कर अनेक विकलांग, बुजुर्ग कर्मचारियों को हताश और निराश कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि वह आर्थिक असुरक्षा बोध और तनाव से ग्रस्त हैं। उनका कहना है कि क्या यह एक नए तरह के सामाजिक न्याय को प्रतिपादित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज जब केंद्र सरकार वृद्धावस्था पेंशन, मुफ्त राशन, किसान सम्मान निधि, महिला पेंशन, विधवा पेंशन जैसी योजनाएं चला रही है, तब सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने पेंशनर्स को उनके जीवन की सुरक्षा के अधिकार से वंचित कर उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय किया गया है। इस अवसर पर गेट मीटिंग की गई और सर्वसम्मति यह निर्णय लिया कि वह पेंशन बहाल न होने तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। इस अवसर पर राजकुमार सिंह ने कहा है कि देश में अनेक संस्थान स्वायत हैं। क्या विकलांगों के लिए कार्यरत संस्थानों के अलावा अन्य किसी स्वायत्त संस्थान के कर्मचारियों की पेंशन बंद कर दी गई है या की जाएगी। उन्होंने कहा कि संस्थान को स्वायत्त इसलिए नहीं बनाया गया कि यह स्वतंत्र रूप से अपने निर्णय ले और कार्य करे, बल्कि इसमें तत्कालीन अधिकारियों के अपने हित थे। इन नीतियों को बनाने में कर्मचारियों का कोई रोल नहीं है, लेकिन आज उन्हें पेंशन से वंचित होने का दंड भुगतना पड़ रहा है। इस अवसर पर पेंशनर, कर्मचारी एवं महिलाएँ उपस्थित रहे। शैलेन्द्र नेगी/ईएमएस/02 फरवरी 2026