लेख
03-Feb-2026
...


घर-घर की चाहत बनी चाय से। सुबह की शुरुआत होती चाय से, शाम की मुलाकात होती चाय से। जो भी आए मेहमान घर मेरे, आव- भगत विदाई होती चाय से। चाय की आदत इस तरह हो गई, घर-घर की चाहत बन गई चाय से। थकावट जब भी महसूस होती है, ताजगी आती गरम-गरम चाय से। जाड़े के दिन में जब भी ठंड लगे, ठंड भी दूर होती गर्म चाय से। चाय का परिवेश इस तरह हो गया, हर घर की इज्जत बनी है चाय से। चाय सेवा परिवार पहचान बनी, चार वर्ष जो चली सेवा चाय से। यह सेवा निरंतर चलती ही रहे, रविवार सुबह होती रहे चाय से। हम सभी करते हैं मंगल कामना, अधिक से अधिक जुड़ते रहे चाय से। (साहित्यकार पत्रकार।)