- मोदी सरकार के आम बजट मे मिशन और केन्द्रीय रेल अश्विनी वैष्णव का ऐतिहासिक विजन में भारतीय रेल देश की आर्थिक रीढ़ व विकसित भारत बनाने में मिल का पत्थर साबित होगा वैश्विक मानचित्र पर आए दिनों चर्चा व चिन्तन भारत का होना आम बात है, लेकिन इन दिनों आम बजट मे रेल मंत्रालय को आवांटित राशि को ले चहूँ दिशाओं में विकाश की तेज रफ्तार व सीटी सुनाई पड़ने लगी है। केन्द्रीय बजट 2026-27 लोकसभा में प्रस्तुत हो चुका है और यह बजट केवल सरकार के आय-व्यय का लेखा नहीं,बल्कि भारत के भविष्य का वह निर्णायक दस्तावेज है जो देश को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को नई शक्ति देता है। इस बजट का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि भारतीय रेल को केन्द्र में रखकर मोदी सरकार ने राष्ट्र निर्माण की गति को और तेज करने का स्पष्ट संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का “विकसित भारत मिशन” और केन्द्रीय रेलमंत्रीअश्विनी वैष्णव का आधुनिक रेलवे विजन अब कागजों की योजना नहीं,बल्कि बजट की ठोस घोषणाओं और रिकॉर्ड निवेश के माध्यम से यथार्थ की धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। भारतीय रेल आज अपने यात्रियों को गंतव्य तक पहुँचाने वाली व्यवस्था नहीं रह गई, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़,उद्योगों की जीवनरेखा,कृषि बाजारों की शक्ति और रोजगार सृजन का सबसे बड़ा इंजन बन चुकी है। आप को मै स्पष्ट कर दुँ किवर्ष 26- बजट में भारतीय रेल को लगभग 2.78 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत आवंटन प्राप्त हुआ है,जो भारतीय रेल के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निवेश है। जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर को राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार माना गया है। रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस निवेश को देश की आर्थिक पटरी पर तेज रफ्तार विकास का विजय घोष कहा है। सर्वविदित रहे कि पिछले दशक में रेलवे में जिस स्तर पर परिवर्तन आया है,वह स्वतंत्र भारत में अभूतपूर्व है। रेलवे नेटवर्क का विस्तार,नई तकनीक का समावेश,स्टेशन पुनर्विकास,हाई- स्पीड रेल परियोजनाएँ और हरित ऊर्जा की दिशा में कदम- यह सब भारत को एक नई रेल क्रांति की ओर ले जा रहा है। रेल बजट 2026-27 का सबसे बड़ा आकर्षण सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा है। ये कॉरिडोर भारत के औद्योगिक केन्द्रों,व्यापारिक शहरों, कृषि उत्पादन क्षेत्रों और निर्यात हब को तेज गति से जोड़ेंगे। हाई-स्पीड रेल नेटवर्क केवल यात्रियों के समय की बचत नहीं करेगा,बल्कि यह निवेश आकर्षण,उद्योग विस्तार, पर्यटन विकास और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था के तीव्र उत्थान का माध्यम बनेगा। जब शहरों के बीच दूरी घटती है,तब व्यापार की गति बढ़ती है,नए रोजगार के अवसर पैदा होते है। इससे आर्थिक गतिविधियाँ कई गुना तेज हो जाती हैं। दिल्ली-वाराणसी, वाराणसी- सिलीगुड़ी जैसे कॉरिडोर उत्तर भारत और पूर्वी भारत की आर्थिक तस्वीर बदलने की क्षमता रखते हैं। यह विकसित भारत की ओर बढ़ते कदमों का सबसे बड़ा संकेत है। इसी बजट में हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना को आगे बढ़ाने का स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। भारत अब केवल परंपरागत डीजल इंजनों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। हाइड्रोजन ट्रेनें पर्यावरण अनुकूल,ऊर्जा दक्ष और भविष्य की परिवहन प्रणाली का प्रतीक हैं। इससे प्रदूषण घटेगा, ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत हरित परिवहन क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाएगा। यह वही सोच है जो विकसित राष्ट्रों की पहचान बन चुकी है। अब भारत भी उसी दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बुलेट ट्रेन परियोजना को भी बजट 2026-27 में नई ऊर्जा मिली है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन भारत के तकनीकी आत्मविश्वास और आधुनिक राष्ट्र निर्माण की पहचान बन चुकी है। बुलेट ट्रेन केवल एक रेल सेवा नहीं,बल्कि भारत की इंजीनियरिंग क्षमता, निवेश सामर्थ्य और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने का प्रतीक है। आने वाले वर्षों में इसका विस्तार भारत को हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट के वैश्विक मानचित्र पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित करेगा। रेलवे विद्युतीकरण भी इस बजट का एक मजबूत स्तंभ है। सरकार का लक्ष्य है कि भारतीय रेल नेटवर्क पूर्णतः विद्युतीकृत होकर ऊर्जा दक्ष, तेज,सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बने। विद्युतीकरण से परिचालन लागत घटेगी,माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और भारत का लॉजिस्टिक्स सेक्टर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत होगा। रेलवे की गति केवल ट्रेनों की रफ्तार नहीं बढ़ाएगी,बल्कि यह भारत की आर्थिक गति को भी तेज करेगी। रेल बजट 2026-27 का सबसे प्रत्यक्ष और जनसरोकार से जुड़ा पक्ष अमृत भारत स्टेशन योजना है। देशभर में सैकड़ों रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। स्टेशन अब केवल प्लेटफॉर्म नहीं रहेंगे, बल्कि आधुनिक यात्री सुविधा केन्द्र,व्यापारिक गतिविधियों के हब और स्थानीय रोजगार के केन्द्र बनेंगे। छोटे शहरों और कस्बों में स्टेशन विकास से होटल,टैक्सी, दुकानें,स्थानीय हस्तशिल्प, खानपान उद्योग और पर्यटन व्यवसाय को नया जीवन मिलेगा। रेलवे स्टेशन अब विकास के प्रवेश द्वार बनेंगे। नई रेल लाइनों,डबलिंग, ट्रैक अपग्रेडेशन और फ्रेट कॉरिडोर परियोजनाओं पर भी बजट में विशेष बल दिया गया है। माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने के लिए रेलवे को आधुनिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में बदला जा रहा है। इससे कृषि उत्पाद तेजी से बाजारों तक पहुँचेंगे,उद्योगों को कच्चा माल समय पर मिलेगा और निर्यात क्षेत्र को नई शक्ति मिलेगी। रेलवे विकास का अर्थ केवल यात्री सुविधा नहीं,बल्कि भारत के उत्पादन और व्यापार की क्षमता में क्रांतिकारी वृद्धि है। इस बजट का सबसे बड़ा सामाजिक प्रभाव रोजगार के क्षेत्र में दिखाई देगा। नई परियोजनाओं से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे। इंजीनियरिंग,निर्माण,तकनीकी सेवा,आईटी सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था,खानपान,पर्यटन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में रोजगार की व्यापक संभावनाएँ खुलेंगी। रेलवे परियोजनाएँ केवल सरकारी नौकरियाँ नहीं,बल्कि निजी क्षेत्र में भी रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा करती हैं। राज्यवार आवंटन के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि रेलवे विकास अब केवल कुछ बड़े शहरों तक सीमित नहीं,बल्कि पूरे भारत में संतुलित विस्तार का माध्यम बन चुका है। 2026-27 में महाराष्ट्र को लगभग 23,926 करोड़ रुपये,उत्तर प्रदेश को 20,012 करोड़ रुपये,गुजरात को 17,366 करोड़ रुपये,मध्य प्रदेश को 15,188 करोड़ रुपये,पश्चिम बंगाल को 14,205 करोड़ रुपये, राजस्थान को 10,228 करोड़ रुपये,बिहार को 10,379 करोड़ रुपये,झारखंड को 7530 करोड़ रुपये,ओडिशा को 10,928 करोड़ रुपये और असम सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र को 11,486 करोड़ रुपये का आवंटन मिला है। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि रेलवे विकास नीति में क्षेत्रीय संतुलन और व्यापक विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। बिहार जैसे राज्यों में यह निवेश विशेष महत्व रखता है,क्योंकि बीते वर्षों की तुलना में बिहार को कई गुना अधिक आवंटन मिला है। इससे राज्य में नई रेल परियोजनाएँ, स्टेशन विकास,पर्यटन कनेक्टिविटी और स्थानीय व्यापार को बड़ा लाभ होगा। मध्य प्रदेश,छत्तीसगढ़ और दिल्ली जैसे क्षेत्रों में भी रेलवे निवेश में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई है,जो इन क्षेत्रों की औद्योगिक क्षमता और रोजगार अवसरों को व्यापक बनाएगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र में विशेष आवंटन इस बात का संकेत है कि सरकार सीमांत क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। रेल बजट 2026- 27 वास्तव में मोदी सरकार की उस सोच का प्रतिबिंब है। जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार माना गया है। प्रधानमंत्री मोदी का विकसित भारत मिशन अब रेलवे जैसी जीवनरेखा में हो रहे रिकॉर्ड निवेश से वास्तविकता बनता दिख रहा है। वैष्णव का विजन भारतीय रेल को आधुनिक,सुरक्षित,तेज, पर्यावरण अनुकूल और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में निर्णायक है। भारतीय रेल आज नई पटरियाँ बिछा रही है, लेकिन उससे भी अधिक वह भारत के भविष्य की आर्थिक पटरी बिछा रही है। यह बजट आने वाले वर्षों में भारत को न केवल एक विशाल रेल नेटवर्क वाला देश बनाएगा,बल्कि एक ऐसी अर्थव्यवस्था बनाएगा जो गति, सुरक्षा,हरित ऊर्जा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के नए मानकों पर खड़ी होगी। विकसित भारत की ओर दौड़ती यह रेलगाड़ी अब रुकने वाली नहीं है,क्योंकि इसके पीछे राष्ट्र की आकांक्षा है,सरकार की प्रतिबद्धता है और भविष्य की अनिवार्यता है। *मोदी सरकार के आम बजट मे मिशन और केन्द्रीय रेल अश्विनी वैष्णव का ऐतिहासिक विजन में भारतीय रेल देश की आर्थिक रीढ़ व विकसित भारत बनाने में मिल का पत्थर साबित होगा* भारतीय रेल अब केवल यात्रा का माध्यम नहीं, बल्कि भारत के उत्थान,रोजगार,व्यापार और वैश्विक शक्ति बनने की यात्रा का सबसे बड़ा वाहक बन चुकी है। ईएमएस / 03 फरवरी 26